सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक की समस्या से निपटने के लिए आईटी नियमों में कड़े संशोधन किए हैं। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर वायरल होने वाले फर्जी फोटो वीडियो और भ्रामक कंटेंट पर लगाम कसना है जिससे किसी की भी डिजिटल छवि या निजता सुरक्षित रह सके।
तय की गई नई समय-सीमा
संशोधित नियमों के अनुसार अब टेक और सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार या अदालत का आदेश मिलने के बाद किसी भी गैर-कानूनी डीपफेक कंटेंट को महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा जो कि पहले 36 घंटे हुआ करता था।
इसके अलावा नग्नता या भेष बदलकर धोखाधड़ी करने वाले मामलों में कार्रवाई की समय-सीमा को घटाकर 2 घंटे कर दिया गया है जो पहले 24 घंटे थी। वहीं अन्य गंभीर मामलों के लिए समय-सीमा 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे कर दी गई है।
अनिवार्य लेबलिंग और मेटाडेटा
नए प्रावधानों के तहत एआई या किसी भी जनरेटिव तकनीक से बनाई गई हर तस्वीर या वीडियो पर स्पष्ट रूप से लेबल और मेटाडेटा लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे आम यूजर्स को यह समझने में आसानी होगी कि कौन सा कंटेंट असली है और कौन सा एआई द्वारा तैयार किया गया है।
सुरक्षा खत्म और आपराधिक केस
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब ऐसे आधुनिक टूल्स और तकनीक का इस्तेमाल करना होगा जो दुष्कर्म, बाल यौन शोषण सामग्री और डीपफेक जैसे आपत्तिजनक कंटेंट को अपलोड होने से पहले ही रोक सकें।
यदि कोई कंपनी इन नियमों का पालन करने में विफल रहती है तो उसे आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी सेफ हार्बर का अधिकार खोना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में, कंपनियों और उनके प्रबंधन पर सीधा आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा।


