भागलपुर। जिले के अकबरनगर रेलवे स्टेशन के समीप मंगलवार को एक भीषण रेल हादसा सामने आया, जिसमें एक ही परिवार के दो सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया है। यह दुर्घटना उस समय घटी जब पीड़ित परिवार पैदल ही रेलवे ट्रैक के रास्ते स्टेशन की ओर जा रहा था। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और सनसनी का माहौल है, वहीं प्रशासनिक लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

​कैसे हुआ हादसा और क्या थी परिस्थितियां?

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक पुरुष और महिला अपने बच्चे के साथ भागलपुर जाने के लिए ट्रेन पकड़ने के वास्ते अकबरनगर रेलवे स्टेशन की तरफ जा रहे थे। शॉर्टकट के चक्कर में तीनों डाउन लाइन की पटरी पर पैदल ही आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज गति से आ रही देवघर मेमू एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन आ गई। संयोगवश उसी समय अप लाइन से एक मालगाड़ी भी जमालपुर की ओर गुजर रही थी। दोनों पटरियों पर एक साथ ट्रेनें आ जाने के कारण परिवार के सदस्यों को संभलने या ट्रैक से हटकर सुरक्षित स्थान पर जाने का मौका ही नहीं मिला। इस भयानक चपेट में आने से पुरुष और महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है।

​घायल बच्चे की मसीहा बने आरपीएफ कर्मी

​इस भीषण दुर्घटना के बीच मानवता की एक मिसाल भी देखने को मिली। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए बच्चे को आरपीएफ कर्मी पालस कुमार हालदार ने तुरंत अपनी गोद में उठाया और बिना एक पल गंवाए रेफरल अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा घायल बच्चे की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय रेलवे पुलिस और आरपीएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस फिलहाल मृतकों की पहचान स्थापित करने के लिए आसपास के लोगों और थानों से संपर्क साध रही है।

​डायल 112 की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

​दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर जनता में नाराजगी है। बताया जा रहा है कि घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद डायल 112 की टीम मौके पर पहुंच गई थी। इस टीम में एक चालक के साथ दो महिला गार्ड और एक पुरुष गार्ड शामिल थे। मौके पर पहुंचने के बाद जब टीम ने ट्रैक पर शवों को देखा, तो उन्होंने कथित तौर पर बिना किसी प्रकार की कार्रवाई या कानूनी प्रक्रिया के शवों को वहीं छोड़ दिया और वापस लौट गए।
​स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील और आपातकालीन समय में पुलिस कार्रवाई, शवों की पहचान और घायल बच्चे की सहायता अत्यंत आवश्यक थी। पुलिस टीम की इस प्रकार की संवेदनहीनता और टालमटोल रवैये को लेकर आम नागरिकों में रोष है और उनकी कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।