डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने अपने सहयोगी दलों को तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) का समर्थन करने की अनुमति केवल इस उद्देश्य से दी थी कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू न हो और भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता में आने का अवसर न मिले।

डीएमके में शामिल हुए एआईएडीएमके के पूर्व कार्यकर्ताओं के स्वागत में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद जब सहयोगी दलों ने उन्हें TVK को समर्थन देने की अपनी योजना से अवगत कराया, तो उन्होंने इसका विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे स्पष्ट कहा कि यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। आप जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं, मैं आपको नहीं रोकूंगा।”

स्टालिन ने दावा किया कि उस समय राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति थी और यदि कोई सरकार नहीं बन पाती, तो राष्ट्रपति शासन लागू होने की संभावना बढ़ जाती। उनके अनुसार, ऐसा होने पर तमिलनाडु में भाजपा के प्रभाव को बढ़ावा मिल सकता था, जिसे रोकना उनकी प्राथमिकता थी।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार गठबंधन सहयोगियों के समर्थन के कारण ही अस्तित्व में है। स्टालिन के मुताबिक, कई सहयोगी दलों के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने TVK को समर्थन देने से पहले उन्हें इसकी जानकारी दी थी।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से पीछे रह गई। बाद में डीएमके के कई पूर्व सहयोगी दलों जिनमें वीसीके, आईयूएमएल, वामपंथी दल और कांग्रेस शामिल थे उन्होंने TVK का समर्थन किया, जिससे उसे विधानसभा में बहुमत हासिल हुआ। वहीं, डीएमके 59 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनी और उदयनिधि स्टालिन विपक्ष के नेता बने।

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