दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने शुक्रवार को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (Swarn Kanta Shrma) से जुड़ी कथित टिप्पणियों और सोशल मीडिया पोस्ट (Social Media Post) पर आधारित आपराधिक अवमानना मामले में एक अहम आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए न्याय मित्र (Amicus Curiae) की नियुक्ति की है। मामले की सुनवाई कर रही डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस नवीन चावला (Naveen Chawla) और जस्टिस रविंद्र दुग्गल (Ravindra Duggal) शामिल हैं, ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहूरा (Rajdeepa Behura) को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। अदालत ने कहा कि यह नियुक्ति इसलिए की गई है ताकि मामले की सुनवाई प्रभावित न हो और सभी पक्षों के तर्क संतुलित रूप से सामने आ सकें। साथ ही यह भी बताया गया कि राजदीपा बेहूरा मामले में अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की ओर से दलीलें पेश करेंगी।
मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़ी कथित टिप्पणियों और सोशल मीडिया सामग्री से संबंधित है, जिस पर आरोप है कि इससे अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। सुनवाई कर रही डिवीजन बेंच ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीपा बेहूरा को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है। अदालत ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष सहायता आवश्यक है, ताकि सभी कानूनी पहलुओं पर संतुलित राय मिल सके। अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ सौरभ भारद्वाज सहित अन्य पक्षकारों को इससे पहले अदालत नोटिस जारी कर चुकी है।
क्या हुआ आज हाई कोर्ट में
यह सुनवाई जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुग्गल की डिवीजन बेंच द्वारा की जा रही है। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में पहले ही स्वतः संज्ञान (suo motu) लेकर अवमानना कार्यवाही शुरू कर चुकी है। अब अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस मामले से जुड़े दोनों प्रकरणों को एक साथ सुना जाएगा, ताकि सुनवाई में एकरूपता और समन्वय बना रहे। मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से संबंधित कथित टिप्पणियों और सोशल मीडिया सामग्री से जुड़ा है, जिस पर अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं।
पहला मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान (suo motu) से जुड़ा है। इसमें 14 मई को दिए गए आदेश के तहत अरविंद केजरीवाल और अन्य आम आदमी पार्टी नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी। दूसरा मामला अधिवक्ता अशोक चैतन्य द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। इस याचिका में अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ पत्रकार सौरव दास, सौरभ भारद्वाज और गोपाल राय को भी पक्षकार बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस याचिका को दाखिल करने से पहले दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता (क्रिमिनल) संजीव भंडारी से आवश्यक सहमति ली गई थी।
दोनों केसों पर एक साथ सुनवाई करेगी बेंच
अदालत ने कहा कि लगभग समान आरोपों पर पहले ही अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जा चुकी है और उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास स्वतः संज्ञान (suo motu) वाले मामले में पक्षकार नहीं थे। इसी वजह से कोर्ट ने उन्हें बिना प्रोसेस फीस के नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि वर्तमान याचिका में जिन दस्तावेजों और सामग्री का उपयोग किया गया है, उनकी प्रतियां अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज को भी उपलब्ध कराई जाएं, ताकि सभी पक्षों को समान रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके।
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