पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा की अभेद्य जिम्मेदारी संभालने वाले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। बिहार कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमित कुमार को एसपीजी में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने आधिकारिक आदेश जारी कर उन्हें एसपीजी में विशेष ड्यूटी अधिकारी (OSD) के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।

​वर्तमान में CRPF में दे रहे हैं सेवाएं

​अमित कुमार वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में स्पेशल महानिदेशक (स्पेशल डीजी) के पद पर तैनात हैं। अपनी विशिष्ट कार्यशैली और अनुभव के कारण उन्हें अब देश की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा इकाई में शामिल किया गया है। वे लंबे समय से केंद्र सरकार के विभिन्न सुरक्षा उपक्रमों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

​भविष्य की कमान के लिए विशेष तैयारी

​सरकारी आदेश के अनुसार, अमित कुमार की यह नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। फिलहाल उन्हें एसपीजी में ओएसडी के रूप में तैनात किया गया है। इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य उन्हें प्रधानमंत्री की सुरक्षा की बारीकियों, संगठन की कार्यप्रणाली और एसपीजी के जटिल सुरक्षा प्रोटोकॉल को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करना है। यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके तहत नए नेतृत्व को जिम्मेदारी संभालने से पहले तैयार किया जाता है।

​आलोक शर्मा के बाद संभालेंगे नेतृत्व

​एसपीजी के वर्तमान निदेशक आलोक शर्मा का कार्यकाल 31 मार्च 2027 को समाप्त हो रहा है। आलोक शर्मा के रिटायरमेंट के बाद अमित कुमार आधिकारिक तौर पर एसपीजी निदेशक के रूप में कार्यभार संभालेंगे और प्रधानमंत्री की सुरक्षा की पूरी कमान अपने हाथों में लेंगे।

​क्यों अहम है यह नियुक्ति?

​प्रधानमंत्री की सुरक्षा देश की सबसे संवेदनशील सुरक्षा चुनौतियों में से एक है। एसपीजी का दायित्व केवल सुरक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा घेरा तैयार करना भी है। बिहार कैडर के एक अनुभवी अधिकारी को इस पद के लिए चुनना उनकी प्रशासनिक दक्षता और सुरक्षा मामलों में उनकी पकड़ को दर्शाता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमित कुमार का अनुभव एसपीजी की परिचालन क्षमताओं को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। यह नियुक्ति न केवल बिहार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम भी मानी जा रही है।