अहमदाबाद: गुजरात के अमरेली के चर्चित ‘लेटर कांड’ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राज्य सरकार को आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर पायल गोटी को 7.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। गांधीनगर में हुई अंतिम सुनवाई के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि मामले में पुलिस की कार्रवाई से युवती के मानवाधिकारों और सामाजिक गरिमा का गंभीर उल्लंघन हुआ है।

सोशल मीडिया पर एक फर्जी लेटर वायरल होने के बाद यह विवाद सामने आया था, जिसके आधार पर पुलिस ने पायल गोटी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पायल ने पुलिस प्रशासन पर अवैध हिरासत, शारीरिक व मानसिक यातना देने और जांच के नाम पर सार्वजनिक रूप से घुमाकर सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

पुलिस की इस सख्त और गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई का पूरे गुजरात में कड़ा विरोध हुआ था। जमानत मिलने के बाद पायल ने न्याय के लिए मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया था। NHRC के इस फैसले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पीड़ित युवती को बड़ी राहत दी है।

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