कुंदन कुमार, पटना। बिहार बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया है कि आम जनमत पार्टी से उनका अब कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन करते हुए कहा कि इस पार्टी को उन्होंने वर्ष 2022 में ही बंद करने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिख दिया था और अपना इस्तीफा भी सौंप दिया था।
620 करोड़ के चंदे पर सफाई और विवाद
हाल के दिनों में आम जनमत पार्टी के बैंक खाते में 620 करोड़ रुपये का भारी-भरकम चंदा आने के बाद बिहार की सियासत में भूचाल आ गया है। कई मीडिया हाउसों में इस मामले को लेकर खबरें चलाई जा रही हैं, जिन्हें अनामिका पासवान ने पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है। उन्होंने कहा कि उनका इस चंदे और पार्टी के मौजूदा कामकाज से कोई वास्ता नहीं है।
दिल्ली के वकीलों और सीए पर गड़बड़ी का आरोप
अनामिका पासवान ने खुलासा किया कि इस पूरे मामले में दिल्ली में बैठे वकीलों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) द्वारा गड़बड़ी की गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस पूरे वित्तीय लेन-देन और चंदे के स्रोतों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जो भी दोषी हों, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक साजिश और दलित होने का दर्द
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह एक दलित परिवार से आती हैं और राजनीतिक तौर पर उन्हें फंसाने के लिए यह सब किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन्होंने 2022 में ही पार्टी छोड़ दी थी और उसके बाद पार्टी का संचालन बंद कर दिया था, तो फिर किस तरह गुजरात के गौरव मिश्रा को अध्यक्ष बनाकर यह चंदा वसूला गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अनामिका पासवान और उनके सहयोगियों ने वर्ष 2022 में ही पार्टी से सामूहिक इस्तीफा दे दिया था और पार्टी बंद करने से जुड़े सभी जरूरी कागजात दिल्ली के वकील को सौंप दिए थे। अब यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इस पूरे मामले पर क्या कुछ कदम उठाता है।



