सियासत कहीं की भी हो, उसमें उलटफेर होना तो एकदम लाजिमी है. ऐसा ही सियासत महाराष्ट्र में हो रहा है. शिवसेना (UBT) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सचिन अहीर ने उद्धव ठाकरे को झटका देते हुए एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है. शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के तुरंत बाद उन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया.

महाराष्ट्र विधानपरिषद उपसभापति पद के लिए महाविकास आघाड़ी ने उम्मीदवार उतार दिया है. महाविकास अघाड़ी की तरफ से जे. एम. अभ्यंकर को प्रत्याशी बनाया गया है.

सचिन अहीर को आदित्य ठाकरे के करीबी नेताओं में गिना जाता है. ये वही सचिन अहीर है, जिन्होंने वर्ष 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना में आए. सचिन अहीर आने से आदित्य ठाकरे के लिए मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट की जीत राह काफी आसान हो गई थी. आज वहीं सचिन अहीर उद्धव ठाकरे के लिए मुसीबत खड़ी करते दिख रहे हैं. 

सचिन अहिर ऐसे समय में पाला बदला है जब महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल और नेताओं के पाला बदलने की चर्चाएं लगातार तेज हैं. शिवसेना (UBT) के कई नेताओं के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की अटकलें लग रही हैं.

शिवसेना शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति (डिप्टी चेयरमैन) पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया. 

सचिन अहीर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी. इसके बाद वे एनसीपी में गए और फिर अविभाजित शिवसेना में शामिल हुए. साल 2022 में शिवसेना के बंटवारे के बाद भी सचिन अहीर उद्धव ठाकरे के साथ बने रहे थे. 

सचिन अहिर के पर्चा भरने के बाद एक बार फिर एकनाथ शिंदे ने अपने फैसले से सभी को चौंका दिया है. सचिन अहिर के रूप में शिंदे ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सरप्राइज दे दिया है.

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