मुंबई महानगरपालिका में डिजिटल कामकाज को लेकर नगरसेवकों को टैबलेट देने के प्रस्ताव पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. विपक्ष ने इसे अनावश्यक खर्च बताते हुए प्रस्ताव पर सवाल उठाया है. BMC प्रशासन का कहना है कि टैबलेट के जरिए कामकाज को डिजिटल और पेपरलेस बनाने के साथ साथ जल्दी से निपटारा किया जा सकेगा. वहीं, विपक्षी दलों ने इसे फिजूलखर्ची बताया है.
इन टैबलेट की खरीद के लिए सम्भावित 5-6 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर घमासान हो रहा है. दूसरी ओर BMC के कामकाज को पेपरलेस बनाने की दलील दी जा रही है.
देश की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC अब हाईटेक और पेपरलेस होने की तैयारी कर रहा है. BMC रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी योजना सभी निर्वाचित नगरसेवकों को करीब 13 इंच के टैबलेट उपलब्ध कराने की है. BMC के पार्षदों और प्रमुख कमेटियों के नेताओं को टैबलेट देने का प्रस्ताव है. जिसकी कीमत करीब 5 से 6 करोड़ रुपये आंकी जा रही है.
विपक्षी नेताओं ने प्रस्ताव की जरूरत और खर्च पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब नगरसेवकों के पास पहले से मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साधन मौजूद हैं. जिससे काम बढ़िया और सुचारु रूप से चल रहा है तो ये खर्च सिर्फ फिजूलखर्ची में गिना जाएगा.

BMC टैबलेट के जरिए कागज के इस्तेमाल को कम करने और BMC के कामकाज को पेपरलेस बनाने की दलील दे रहा है. BMC डिप्टी मेयर संजय घाडी ने कहा कि प्रस्ताव के पीछे तर्क यह है कि नगरसेवकों को बैठकों के दौरान बड़ी मात्रा में कागजी दस्तावेज उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ती है. इससे कागज, प्रिंटिंग और दस्तावेजों के वितरण पर होने वाला खर्च कम करने के साथ-साथ BMC के कामकाज को अधिक डिजिटल और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
दूसरी तरफ विपक्ष का तर्क है कि करोड़ों रुपये की यह राशि सड़क, नालों की सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं पर खर्च की जा सकती है. इसलिए इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले BMC प्रशासन को खर्च की उपयोगिता और आवश्यकता स्पष्ट करनी चाहिए.
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