US-ईरान युद्ध को लेकर नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुरजोर समर्थन किया है. मार्क रुटे ने अमेरिका द्वारा ईरान पर फिर से अटैक को सही ठहराते हुए कहा है कि ईरान पर अटैक होना बहुत जरूरी थी. ईरान युद्ध से अब तक दूरी बनाए रखने वाले नाटो के प्रमुख मार्क रुट अब अमेरिकी हमलों को जस्टिफाई करने में लगे हुए है. अंकारा में नाटो नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने ये सब कहा.

रुटे का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले वे लगातार कहते रहे थे कि ईरान और अमेरिका का यह संघर्ष नाटो का युद्ध नहीं है.

हॉर्मुज में तीन तेल टैंकरों पर ईरान की IRGC द्वारा हमलों और उसके जवाब में अमेरिका की ताज़ा सैन्य कार्रवाई पर मार्क रुटे का बयान आया है. नाटो महासचिव मार्क रुटे ने पहली बार खुलकर अमेरिकी हमलों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि  ईरान पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ‘पूरी तरह ज़रूरी’ थी, क्योंकि ईरान युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा था.

मार्क रुटे ने बुधवार (8 जुलाई) को अंकारा में नाटो नेताओं की बैठक से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जब किसी संघर्ष में युद्धविराम लागू हो और कोई पक्ष उसका पालन न करे, तो जवाबी कार्रवाई करना जरूरी हो जाता है. 

नाटो प्रमुख का यह बयान तब आया है जब एक दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की में नाटो समिट के दौरान कहा कि ग्रीनलैंड पर यदि नाटो के सहयोगी अमेरिका का साथ नहीं देते है तो US यूरोप से अपना सैनिक वापस बुला सकता है.

मार्क रुटे के बयान से अभी ऐसा ही प्रतीत हो रहा है कि ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों को ट्रंप की धमकी के यूरोपीय नेता ट्रंप को सैन्य गठबंधन नाटो के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं. क्योंकि इससे पहले नाटो के महासचिव मार्क रुटे लगातार कहते रहे थे कि ईरान और अमेरिका का यह संघर्ष नाटो का युद्ध नहीं है.

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