मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. धार्मिक नगरी अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Shri Krishna Janmashtami) का उल्लास देखते ही बना. आधी रात को जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, पूरा मंदिर परिसर घंटा-घड़ियाल और भक्तों के जयकारों से गूंज उठा. हजारों भक्त इस दिव्य क्षण के साक्षी बने.
दरअसल शाम से ही मंदिर में भगवान के जन्म के पदों का गायन शुरू हो गया था. भजन-कीर्तन की स्वर लहरियों के बीच मंदिर उत्सव की भावधारा में डूबा रहा. इस अवसर पर श्रीमद् भागवत के दशम स्कंध के पहले, दूसरे और तीसरे अध्याय का पारायण किया गया.
इसे भी पढ़ें : गोरखनाथ मंदिर में आधी रात गूंजा ‘नंद घर आनंद भयो’, CM योगी ने झुलाया लड्डू गोपाल; राधा-कृष्ण बने बच्चों को दिए गिफ्ट
अर्चक पारंपरिक परिधान से अलग पीत वस्त्र धारण कर भगवान की आराधना में लीन रहे. भगवान को झूले युक्त आसन पर विराजित किया गया. ठीक रात्रि 12 बजे महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि, ट्रस्टी महंत दिनेन्द्र दास और उत्सव प्रमुख आचार्य इंद्रदेव ने 501 बत्तियों से भगवान की महाआरती उतारी. इस दौरान पारंपरिक जन्मोत्सव के पदों का गायन चलता रहा.जन्म के बाद भगवान को माखन-मिश्री सहित विविध व्यंजनों का भोग लगाया गया, जिसे बाद में भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया. भगवान को नए वस्त्र पहनाकर विशेष श्रृंगार किया गया. आरती के बाद मुदित भक्त देर तक जयकारे लगाते रहे.
अब रामलला की श्रृंगार आरती और भी भव्य
आचार्य इंद्रदेव के अनुसार शनिवार से रामलला की श्रृंगार आरती को और भव्य बना दिया गया है. अब गर्भगृह के बाहर से चार अर्चक 108-108 बत्तियों से भी भगवान की आरती करेंगे. यह क्रम शनिवार से शुरू हो गया है और अब नित्य इसी तरह आरती सजेगी.उन्होंने बताया कि धर्म समिति के गठन के बाद भगवान की सेवा को रामानंदी परंपरा के अनुसार और अधिक समृद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है.



