अयोध्या. राम मंदिर चढ़ावा विवाद और पद छोड़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय सार्वजनिक गतिविधियों से लगभग दूर हैं. बताया जा रहा है कि वह अयोध्या में रहकर अपने जीवन का पहला चातुर्मास करेंगे. 25 जुलाई से 21 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक वह रामलला की शरण में रहकर जप, तप, रामचरितमानस का पाठ और सात्विक जीवनचर्या का पालन करेंगे.

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23 जून से एकांतवास में हैं चंपत राय

जानकारी के अनुसार, चंपत राय 23 जून से राम मंदिर परिसर के निकट स्थित तीर्थ क्षेत्र भवन में सीमित संपर्क के साथ रह रहे हैं. बताया जा रहा है कि वह प्रतिदिन कई घंटे मंत्र जाप, ध्यान और रामचरितमानस का पाठ करते हैं साथ ही केवल चुनिंदा लोगों से ही मुलाकात कर रहे हैं.

चातुर्मास में नहीं छोड़ेंगे अयोध्या

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय 25 जुलाई से शुरू होने वाले चातुर्मास के दौरान 21 नवंबर तक अयोध्या से बाहर नहीं जाएंगे. इस अवधि में वह धार्मिक अनुष्ठानों, साधना और आध्यात्मिक अनुशासन का पालन करेंगे.

हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान एक ही स्थान पर रहकर जप, तप, दान, व्रत और भगवान की आराधना करने से व्यक्ति के दोष दूर होते है. उसे मानसिक शांति प्राप्त होती है और वह आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ता है.

दान विवाद के बाद चर्चा में आए थे

राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले के बाद चंपत राय लगातार चर्चा में रहे. इसके बाद उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया. इस पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है.

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‘कलंक मुक्ति’ की चर्चाओं के बीच नई दिनचर्या

चंपत राय के चातुर्मास और एकांतवास को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं. हालांकि, उनके इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर आधिकारिक तौर पर इसे व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधना बताया गया है. जांच और अन्य मामलों पर संबंधित एजेंसियों की प्रक्रिया अलग से जारी है.