आजमगढ़. उत्तर प्रदेश विधानसभा के सबसे उम्रदराज समाजवादी पार्टी के विधायक आलमबदी आजमी का बुधवार देर रात निधन हो गया. वह पिछले चार महीनों से बीमार थे और लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. देर रात आजमगढ़ स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली. आज गुरुवार दोपहर उन्हें पूरे राजकीय सम्मान और नम आंखों के बीच सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.

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पांच बार विधायक बने, सादगी बनी पहचान

16 मार्च 1936 को आजमगढ़ के विंदावल गांव में जन्मे आलमबदी आजमी ने 1996, 2002, 2012, 2017 और 2022 में निजामाबाद विधानसभा सीट से जीत दर्ज की. 2007 में हार के बावजूद उन्होंने जनता का साथ नहीं छोड़ा. दो जोड़ी हवाई चप्पल, साधारण कुर्ता-पायजामा और कीपैड मोबाइल के साथ उनका सादा जीवन विपक्ष के नेताओं के बीच भी सम्मान का कारण बना.

मंत्री पद ठुकराकर जनता की सेवा को दी प्राथमिकता

2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव ने उन्हें मंत्री बनने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि मंत्री बनने से वह अपने क्षेत्र की जनता को पूरा समय नहीं दे पाएंगे. उनका मानना था कि विधायक के रूप में लोगों के बीच रहकर सेवा करना ही सबसे बड़ा दायित्व है.

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ईमानदार राजनीति की मिसाल बने आलमबदी

आलमबदी आजमी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कभी भ्रष्टाचार या कमीशन के आरोप नहीं झेले. वह अपनी विधायक निधि से बनने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता स्वयं मौके पर जाकर जांचते थे. उन्होंने कभी सरकारी सुरक्षा नहीं ली और आम लोगों के बीच रहकर जनसेवा को अपनी पहचान बनाया. उनके निधन से समाजवादी पार्टी सहित पूरे प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर है.