भिवानी जिले के आदर्श गांव सुई स्थित श्री संकट मोचन बालाजी धाम में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। आचार्य डॉ. उमेद शर्मा ने गुरु महिमा और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला, साथ ही पौधारोपण और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का संकल्प लिया गया।

अजय सैनी, भिवानी। जिला के आदर्श गांव सुई स्थित श्री संकट मोचन बालाजी धाम में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर धाम परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ नैतिक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा से जुड़े कई संकल्प लिए गए। कार्यक्रम में संस्थान के अध्यक्ष, शिक्षाविद एवं आचार्य डॉ. उमेद शर्मा ने गुरु की महिमा, जीवन में संस्कारों के महत्व और सामाजिक दायित्वों पर विस्तृत प्रकाश डाला।

समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षाविद डॉ. उमेद शर्मा ने कहा कि गुरु ही मनुष्य को जीवन जीने का सच्चा मार्ग दिखाते हैं और संसार में महान बनाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं और गुरु ही महेश हैं। गुरु से बड़ा इस संसार में कोई नहीं है। जीवन में सबसे पहली गुरु मां और माता-पिता होते हैं, जिनकी सेवा सर्वोपरि है। इसके बाद स्कूल के शिक्षक हमें ज्ञान देते हैं और धार्मिक गुरु हमें मोक्ष तथा अच्छे कर्मों के मार्ग पर ले जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों का कोई व्यक्तिगत गुरु नहीं है, वे भगवान श्री हनुमान जी, भगवान शिव या श्री कृष्ण को अपना गुरु मानकर जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

बच्चों में नैतिक शिक्षा और संस्कारों पर बल

आज के दौर में बच्चों में घटते संस्कारों पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है। बच्चों को संस्कारवान व नैतिक शिक्षा दी जानी चाहिए। रोजगारपरक और सामाजिक शिक्षा से जोड़ना चाहिए ताकि वे देश और समाज के उत्थान में योगदान दे सकें। तनाव, अवसाद और भय के इस आधुनिक युग में केवल गुरु की कृपा और ईश्वर भक्ति ही मनुष्य को सच्चा सुख और शांति दे सकती है।

सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ

गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर संकट मोचन बालाजी धाम में हर महीने आयोजित होने वाले नियमित धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न हुए। इस दौरान धाम में हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और रामायण पाठ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं को गुरु महिमा से अवगत कराते हुए आशीर्वाद दिया गया। अनुष्ठान के उपरांत सभी भक्तजनों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा का संकल्प

इस दौरान आगामी सावन मास और वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए आचार्य उमेद कौशिक गुरुकुल फाउंडेशन की ओर से दो मुख्य संकल्प लिए गए। इस दौरान फाउंडेशन की तरफ से धाम परिसर व आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाए गए। सभी श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे अपने माता-पिता, गुरुजनों या पूर्वजों के नाम पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं ताकि प्रकृति हरी-भरी रहे।

फाउंडेशन ने जरूरतमंद और असहाय बच्चों को पाठ्य सामग्री वितरित करने और उनकी शिक्षा का खर्च उठाने का संकल्प लिया। जो भी जरूरतमंद बच्चे हैं, वे ट्रस्ट से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर राजकुमार, मास्टर दिनेश शास्त्री, सुरेंद्र शास्त्री, रमन शर्मा, संदीप जांगड़ा, मुरारी लाल शर्मा, पुजारी रामकरण शास्त्री, भास्कर शर्मा, खुशी शर्मा, हर्षिता शर्मा, लव शर्मा तथा अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन विश्व शांति, सुख-समृद्धि की प्रार्थना और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।