Sanwaliya Seth: राजस्थान के डूंगरपुर जिले के आसपुर निवासी किसान अमरजी पाटीदार ने अपनी आस्था का अनोखा उदाहरण पेश किया है। उन्होंने करीब ₹1.50 करोड़ मूल्य की 10.15 बीघा जमीन भगवान श्री सांवलिया सेठ के नाम रजिस्ट्री कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने अपने करीब ₹1.50 करोड़ मूल्य के मकान को भी मंदिर के नाम समर्पित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज मंदिर प्रशासन को सौंप दिए हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह मकान भी भगवान के नाम दर्ज हो जाएगा।

10 साल बाद पूरी हुई जमीन दान की प्रक्रिया
अमरजी पाटीदार ने बताया कि वह वर्ष 2013 से लगातार सांवलियाजी मंदिर के दर्शन करने आते रहे हैं। वर्ष 2015-16 में उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति भगवान को समर्पित करने की इच्छा मंदिर प्रशासन के सामने रखी थी। हालांकि, जमीन अलग-अलग रिश्तेदारों के नाम दर्ज होने के कारण दान की प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने वर्षों तक प्रयास कर जमीन को एक नाम पर करवाया और अंततः 23 जुलाई को रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन भगवान के नाम दर्ज करवा दी।
10.15 बीघा जमीन पर हैं आम के पेड़
अमरजी पाटीदार ने बताया कि दान की गई जमीन पर आम के कई पेड़ भी हैं। उनकी इच्छा है कि भविष्य में इस भूमि पर गौशाला बनाई जाए या इसे सामाजिक और धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग किया जाए। मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी प्रथम शिव शंकर पारीक के अनुसार, सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद करीब 1.165 हेक्टेयर (लगभग 10.15 बीघा) भूमि भगवान श्री सांवलिया सेठ के नाम दर्ज कर दी गई है।
अब मकान भी होगा भगवान के नाम
जमीन की रजिस्ट्री के बाद अमरजी पाटीदार सांवलियाजी मंदिर पहुंचे और अपने बहुमंजिला मकान को भी भगवान के नाम समर्पित करने के लिए दान-पत्र पर हस्ताक्षर किए। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मकान की रजिस्ट्री भी मंदिर के नाम की जाएगी।
माता-पिता की सेवा में बीता जीवन
अमरजी पाटीदार ने बताया कि उनके पिता का निधन वर्ष 2012 में हुआ था। इसके बाद वह अपनी मां की सेवा में लगे रहे। वर्ष 2023 में उनकी मां का भी निधन हो गया। उन्होंने बताया कि माता-पिता की सेवा के कारण उन्होंने विवाह नहीं किया। उन्होंने कहा कि बचपन से भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम के प्रति उनकी गहरी आस्था रही है। इसी श्रद्धा के चलते उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति भगवान को समर्पित करने का निर्णय लिया।
मां के चांदी के आभूषण भी करेंगे अर्पित
अमरजी ने बताया कि इससे पहले वह अपने पिता के सोने के आभूषण भी भगवान सांवलिया सेठ को अर्पित कर चुके हैं। अब उनकी इच्छा अपनी मां के करीब 1 किलो चांदी के आभूषण भी मंदिर में चढ़ाने की है।
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