बांका। जिले में पुलिस की लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रजौन थाना क्षेत्र में पुलिस ने बिना ठोस पुष्टि के एक अज्ञात शव एक परिवार को सौंप दिया, जिसे उन्होंने अपना परिजन मानकर दफन कर दिया। हैरत की बात तब हुई जब मृत व्यक्ति अगले ही दिन जीवित अपने घर लौट आया।

​क्या था पूरा मामला?

सोमवार को पुनसिया बाजार के पास एक वृद्ध की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। मृतक की पहचान न होने पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं। धोरैया के भगवानपुर निवासी मुजाहिद अंसारी ने तस्वीर देखकर शव को अपने पिता सगीर अंसारी के रूप में पहचाना। पुलिस ने बिना गहन जांच के शव उन्हें सौंप दिया, जिसे परिवार ने मुस्लिम रीति-रिवाजों के साथ दफना दिया।

​अगले दिन घर लौटा मृत व्यक्ति

बुधवार को जब सगीर अंसारी सकुशल घर लौटे तो परिजन दंग रह गए। सगीर अंसारी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और अक्सर घर से निकल जाते हैं इसी वजह से परिवार तस्वीर देखकर भ्रमित हो गया था।

​कब्र खोदकर निकाला गया शव

इसी बीच भागलपुर के गोविंदपुर निवासी एक युवक ने पुलिस से संपर्क कर दावा किया कि वायरल तस्वीर में दिख रहा शव उसके पिता रामकिशन मोहली का है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कुरमा कब्रिस्तान से शव को बाहर निकलवाया। पहचान की पुष्टि होने के बाद शव रामकिशन मोहली के असली परिजनों को सौंप दिया गया, जिनका अब हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया जाएगा।

​पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस घटना ने पुलिस की शव पहचान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने केवल एक फोटो के आधार पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी। परिजनों को शव सौंपने से पहले डीएनए टेस्ट, पुराने निशानों या अन्य पुख्ता प्रमाणों की अनदेखी करना पुलिस की बड़ी लापरवाही है।
​रजौन थानाध्यक्ष राजरतन ने पहचान में हुई चूक को स्वीकार किया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन इस घटना ने दो परिवारों को जो मानसिक पीड़ा दी, उसकी भरपाई करना कठिन है। एक परिवार ने जिंदा व्यक्ति का शोक मनाया तो दूसरे को अपने परिजन के शव को कब्र से निकलवाने जैसे कष्टप्रद दौर से गुजरना पड़ा।