Supreme Court On Bar Council Women Reservation: देश के बार काउंसिलों में वर्षों से चले आ रहे पुरुष एकाधिकार को तोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। बार काउंसिल में महिला वकीलों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश सुनाया है। देश के शीर्ष न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल को आदमियों का क्लब बताते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को हर राज्य में 2 महिला सदस्यों को नामित करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया है कि वे अपने राज्य की बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों की नियुक्ति करें। इस दौरान शीर्ष न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार काउंसिलें अब आदमियों का क्लब बन चुकी हैं और किसी एक समूह का यह दबदबा तुरंत खत्म होना चाहिए। यह पूरा मामला राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने से जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला काउंसिल ऑफ इंडिया और विभिन्न राज्य बार काउंसिलों के चुनाव व प्रतिनिधित्व से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान दिया। साथ ही वकीलों के संगठनों में असंतुलित प्रतिनिधित्व पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट के मुताबिक इस फैसले का मकसद केवल कागजों पर संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि बार काउंसिलों के प्रशासनिक फैसलों में महिलाओं की हकीकी भागीदारी पुख्ता करना है।
देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि बार काउंसिलों का ढांचा समावेशी होना चाहिए ताकि महिला वकीलों को नीति-निर्माण में बराबर का स्थान मिल सके। निर्देश के अनुसार प्रत्येक राज्य के हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अपने विवेक से दो महिला सदस्यों का नामांकन करेंगे। इनमें पहली सदस्य हाई कोर्ट की एक पूर्व महिला न्यायाधीश होंगी और दूसरी सदस्य बार में अच्छी प्रतिष्ठा रखने वाली एक सीनियर महिला वकील होंगी। अदालत ने यह भी शर्त रखी है कि इन दोनों सदस्यों का बार काउंसिल की चुनावी राजनीति या गुटबाजी से कोई संबंध नहीं होगा। इस व्यवस्था से दोनों महिला सदस्य किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर पूरी निष्पक्षता के साथ वकीलों के हित और संस्थागत सुधारों पर काम कर सकेंगी। साथ ही कोर्ट ने यह भी तय कर दिया कि चुनाव में हारने वाली महिला उम्मीदवार को भी योग्यता के आधार पर सह-नामित किया जा सकेगा।
राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण
यह संपूर्ण मामला राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने से जुड़ा हुआ है। तय फार्मूले के अनुसार बार काउंसिल में 20 प्रतिशत सीटें सीधे चुनाव के माध्यम से भरी जानी हैं, जबकि शेष 10 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं को सह-नामित किया जाएगा। सुनवाई के दौरान आरक्षित सीटों पर ट्रांसफरेबल वोट (हस्तांतरणीय वोट) की गणना के तकनीकी विषय पर भी कानूनी बहस हुई। इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय पर्यवेक्षण समिति को सौंप दिया गया है। अदालत ने समिति को निर्देश दिया है कि वह देश भर के वकील संगठनों से सुझाव आमंत्रित करे, उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दे और मतदान पद्धति की नई सिफारिश जल्द कोर्ट के सामने पेश करें।
अदालतों में महिलाओं की संख्या 40 प्रतिशत के करीब पहुंची
बता दें कि भारतीय अदालतों में पंजीकरण कराने वाले नए वकीलों में महिलाओं की संख्या 40 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी है। जबकि राज्य बार काउंसिलों के कार्यकारी पदों पर महिलाओं की मौजूदगी अब भी 5 प्रतिशत से कम है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश बार काउंसिलों के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है, जो पुरुष एकाधिकार को समाप्त कर संस्थागत संतुलन बनाएगा।
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