बराड़ा कस्बे में आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या के कारण नागरिक बेहद परेशान हैं। हाल ही में सरकारी स्कूल रोड पर दो सांडों के बीच हुई भयंकर लड़ाई से बड़ा हादसा टल गया।

अनिल शर्मा, अंबाला। कस्बे में आवारा पशुओं की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन नगरपालिका प्रशासन इस ओर कोई ठोस कदम उठाता नजर नहीं आ रहा। बीते दिन शाम को सरकारी स्कूल रोड पर उस समय अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब दो आवारा सांड बीच सड़क पर ही आपस में बुरी तरह भिड़ पड़े। करीब 20 मिनट तक दोनों सांडों का यह हिंसक मुकाबला बीच सड़क पर चलता रहा, जिससे वहां से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास के दुकानदारों में भारी दहशत का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों ने नपा प्रशासन की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली के खिलाफ गहरा रोष प्रकट करते हुए कहा कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी इस गंभीर समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है।

बाल-बाल बचे राहगीर और दुकानदार

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लड़ते हुए सांड कई बार अचानक दुकानों और सड़क किनारे खड़े वाहनों की तरफ तेजी से बढ़े, जिससे वहाँ बहुत बड़ा हादसा होने का सीधा खतरा पैदा हो गया था। आसपास मौजूद हिम्मीती दुकानदारों ने लाठियां और डंडे दिखाकर बड़ी मुश्किल से उन्हें किसी तरह वहां से भगाया और स्थिति को नियंत्रित किया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि उस समय मुख्य सड़क पर स्कूल के बच्चों या आम लोगों की ज्यादा भीड़ होती, तो निश्चित ही कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती थी। लोगों का आरोप है कि प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है, तभी उनकी नींद खुलेगी।

बैठकों और दावों तक सीमित प्रशासन

स्थानीय लोगों ने सीधे तौर पर नगरपालिका प्रशासन पर घोर लापरवाही और उदासीनता बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। नागरिकों का कहना है कि बराड़ा की मुख्य सड़कों, व्यस्त बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में रोजाना आवारा पशु खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं, लेकिन प्रशासन केवल कागजी बैठकों और खोखले दावों तक ही पूरी तरह सीमित है। शहर में पहले भी कई बार इन आवारा पशुओं के कारण छोटे-बड़े गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं, बावजूद इसके धरातल पर आज तक कोई भी स्थायी और ठोस समाधान नहीं किया गया है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर जनता को भुगतना पड़ रहा है।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा को खतरा

लोगों का यह भी आरोप है कि मुख्य स्कूलों और बाजारों के ठीक आसपास भी आवारा पशु हमेशा झुंड बनाकर घूमते रहते हैं, जिससे छोटे बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर हर वक्त बड़ा खतरा बना रहता है। अब चूंकि बरसात का मौसम भी सिर पर है, ऐसे में सड़कों पर बीचों-बीच बैठे रहने वाले ये मवेशी पूरी यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि जल्द से जल्द विशेष अभियान चलाकर इन आवारा पशुओं को पकड़कर नजदीकी गौशालाओं में सुरक्षित भेजा जाए, ताकि शहर की सड़कों को राहगीरों के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।