Bastar News Update : जगदलपुर. शहर के बाजार में अब सवाल सिर्फ मिलावट का नहीं, बल्कि पुराने माल को नया बनाकर बेचने के खेल का भी है. शिकायतें हैं कि एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके खाद्य और रोजमर्रा के सामान की पैकिंग बदलकर उन्हें बाजार में उतारा जा रहा है. चाय, नमकीन और खाद्य सामग्री से लेकर कॉस्मेटिक, इत्र और साबुन तक पर सवाल उठ रहे हैं. कहीं पुराने रैपर बदलने तो कहीं पैकेट पर दर्ज तारीख में छेड़छाड़ की शिकायतें सामने आ रही हैं. बड़े शहरों से एक्सपायरी के करीब पहुंचा माल यहां पहुंचने की बात भी कही जा रही है. सबसे बड़ा सवाल होटल, कैफे और रेस्तरां की रसोई को लेकर है. खाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री कहां से आ रही है और उसे किस तरह रखा जा रहा है, इसकी जांच जरूरी है. बारिश के मौसम में खुले में रखी खाद्य सामग्री और स्ट्रीट फूड से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है. उल्टी-दस्त, पेट की बीमारी, पीलिया और हेपेटाइटिस जैसी समस्याओं का खतरा दूषित भोजन से बढ़ सकता है. दूसरी तरफ शिकायतों के बाद सैंपल लिए भी जाएं तो रिपोर्ट आने तक संबंधित माल बाजार से निकल जाने का सवाल बना रहता है. ऐसे में सिर्फ त्योहारों या शिकायतों के बाद कार्रवाई के बजाय पूरे साल नियमित जांच की जरूरत है. दुकानों, गोदामों और होटल-रेस्तरां से जोखिम के आधार पर सैंपलिंग हो तो ऐसे खेल पर लगाम लग सकती है. क्योंकि ग्राहक के लिए पैकेट देखकर असली तारीख और बदली हुई तारीख में फर्क करना आसान नहीं है. अब जरूरत इस बात की है कि बाजार की निगरानी कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दे.
बस्तर के लोहे ने जापान को दिखाई नई राह
दंतेवाड़ा. बैलाडीला सिर्फ लौह अयस्क का पहाड़ नहीं, बल्कि भारत-जापान के रिश्तों की एक अहम कहानी भी अपने भीतर समेटे है. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान को अपनी अर्थव्यवस्था और उद्योग को फिर से खड़ा करना था. इसी दौर में उसकी नजर बस्तर के बैलाडीला में मौजूद उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क पर पड़ी. 1957 में जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भारत पहुंचकर अलग-अलग लौह अयस्क क्षेत्रों का अध्ययन किया. असादा के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के बाद बैलाडीला को लेकर जापान की दिलचस्पी और बढ़ी. इसके बाद मार्च 1960 में भारत और जापानी इस्पात मिलों के संगठन के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ. समझौते के तहत बैलाडीला से 40 लाख टन लौह अयस्क जापान भेजने की व्यवस्था तय हुई. इस खनिज को विशाखापट्टनम तक पहुंचाने के लिए किरंदुल-कोत्तावलसा रेल संपर्क भी इसी दौर में महत्वपूर्ण बना. बैलाडीला का लोहा रेल से विशाखापट्टनम पहुंचा और वहां से समुद्री रास्ते जापान भेजा गया. यानी बस्तर का पहाड़ सिर्फ भारत के औद्योगिक विकास का हिस्सा नहीं बना, बल्कि जापान की औद्योगिक वापसी में भी इसकी भूमिका रही. इससे पहले पीएन बोस जैसे भूगर्भशास्त्रियों ने बैलाडीला के खनिज भंडार की पहचान की थी. बाद में सर्वेक्षणों ने यहां लौह अयस्क से समृद्ध कई पहाड़ी क्षेत्रों को चिन्हित किया. आज भी बैलाडीला भारत के प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्रों में गिना जाता है और जापान से जुड़ी इसकी कहानी इसे और खास बनाती है. यही वजह है कि बैलाडीला बस्तर की धरती पर खड़े एक ऐसे अध्याय का नाम है, जिसने दो देशों की औद्योगिक कहानी को जोड़ा.
नकली सोने का हार बेचने वाले दो गिरफ्तार
जगदलपुर. बस्तर के नगरनार इलाके में सोने के नाम पर ठगी का ऐसा मामला सामने आया, जिसमें लालच दिखाकर ग्रामीण को जाल में फंसाया गया. पुलिस के मुताबिक 6 अगस्त को दो आरोपी मंगनपुर निवासी लिंगेश्वर सेठिया के घर पहुंचे. दोनों ने एक हार दिखाते हुए उसकी कीमत करीब पांच लाख रुपए बताई. इसके बाद रिश्तेदार को रायपुर भेजने के लिए तत्काल 10 हजार रुपए की जरूरत बताकर हार बेचने का सौदा किया. ग्रामीण ने भरोसा कर 10 हजार रुपए दे दिए और हार अपने पास रख लिया. लेकिन असली सोना समझकर लिया गया हार जब सोनार के पास पहुंचा तो पूरा मामला खुल गया. जांच में हार नकली निकला और उसमें पीतल मिश्रित होने की बात सामने आई. शिकायत मिलते ही पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की और दोनों को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दुर्ग निवासी मोहन लाल सोलंकी और बलौदाबाजार निवासी मोहन राय के रूप में हुई है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4950 रुपए नकद बरामद किए हैं. इसके अलावा तीन नकली सोने की मालाएं, जिनका कुल वजन 342.190 ग्राम बताया गया है, भी जब्त की गईं. एक मोबाइल फोन भी पुलिस ने बरामद किया है. पूछताछ में दोनों ने ठगी की बात स्वीकार की, जिसके बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. मामला एक बार फिर बताता है कि सस्ते में महंगा सोना मिलने के लालच में बिना जांच के पैसा देना कितना भारी पड़ सकता है.
16 ग्रामीण फंसे तो मैदान में उतरी रेस्क्यू टीम
नारायणपुर. बस्तर जिले के नारायणपुर में लगातार बारिश ने सड़क, पुल और जल निकासी व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. जुलाई के आखिरी सप्ताह से कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश के कारण कई जगहों पर रास्ते प्रभावित हुए हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग 130डी के नारायणपुर-कुतुल मार्ग पर भी डायवर्सन स्थल की स्थिति का जायजा लिया गया. प्रशासन ने प्रभावित हिस्सों में सुधार और मरम्मत का काम तेज करने के निर्देश दिए हैं. शहर में जलभराव वाले इलाकों में नगर पालिका की टीमों ने पानी निकासी और नालियों की सफाई कराई. इसी बीच धौड़ाई थाना क्षेत्र के चिकपाल में अचानक जलस्तर बढ़ने से 16 ग्रामीण बाढ़ के पानी में फंस गए. इनमें 7 बच्चे, 3 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल थे. सूचना मिलते ही पुलिस, आईटीबीपी और जिला बाढ़ बचाव टीम मौके पर पहुंची. संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. बारिश के बीच प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं. बिंजली डैम की मेढ़ पर भी लोगों और वाहनों की आवाजाही को जोखिमपूर्ण मानते हुए रोक लगाने के निर्देश दिए गए. सुरक्षा के लिए चेतावनी बोर्ड लगाने और जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है. प्रशासन ने लोगों से जलभराव और तेज बहाव वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही नहीं करने की अपील की है. क्योंकि बारिश अभी चुनौती बनी हुई है और संवेदनशील स्थानों पर थोड़ी सी लापरवाही बड़ा खतरा पैदा कर सकती है.

1200 घरों की जांच, 173 संदिग्धों से पूछताछ…
नारायणपुर. पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए एक साथ बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान चलाया. नगर पंचायत के सभी 15 वार्डों के अलावा आसपास के कई इलाकों को भी अभियान में शामिल किया गया. इस दौरान 1200 से ज्यादा घरों और 160 से अधिक दुकानों एवं प्रतिष्ठानों की जांच की गई. पुलिस की 21 टीमों में करीब 150 अधिकारी और कर्मचारी इस अभियान का हिस्सा रहे. अभियान के दौरान 173 संदिग्ध लोगों को पूछताछ और दस्तावेज सत्यापन के लिए रोका गया. बाहर से आकर क्षेत्र में रहने वाले लोगों की जानकारी भी जुटाई गई. मकान मालिकों को किरायेदारों और दूसरे लोगों की जानकारी समाधान ऐप में दर्ज करने के लिए जागरूक किया गया. मटन, नाई, कबाड़ी सहित अलग-अलग प्रतिष्ठानों में काम करने वाले बाहरी कर्मचारियों का भी सत्यापन किया गया. पहचान दस्तावेजों के आधार पर जानकारी जुटाने के साथ संबंधित थानों से भी तस्दीक कराई जा रही है. पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता नहीं मिलने पर लोगों को हिदायत देकर छोड़ दिया गया. अभियान का मकसद किसी को परेशान करना नहीं बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है. पुलिस का कहना है कि इस तरह के सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेंगे. इसी बीच स्कूल में नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम के जरिए छात्रों को भी नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई गई. यानी नारायणपुर में एक तरफ सुरक्षा की निगरानी बढ़ाई जा रही है तो दूसरी तरफ युवाओं को नशे से बचाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
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