Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर में नक्सल समस्या के कमजोर पड़ने के साथ पर्यटन को नई रफ्तार मिलती दिखाई दे रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में पर्यटक अब बस्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत देखने पहुंच रहे हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी, कोटमसर और दंतेश्वरी मंदिर पर्यटकों की पसंद बने हुए हैं। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से होटल, रेस्टोरेंट, वाहन और स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिल रहा है। लेकिन बस्तर में पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाला व्यवस्थित पर्यटन सर्किट अब भी बड़ी जरूरत बना हुआ है। बाहर से आने वाले पर्यटकों को कई जगहों की दूरी, रास्ते और स्थानीय सुविधाओं की जानकारी जुटाने में परेशानी होती है। एक ही यात्रा में सभी प्रमुख स्थलों को कवर करना भी कई पर्यटकों के लिए मुश्किल हो जाता है। जगदलपुर को केंद्र बनाकर प्रमुख पर्यटन स्थलों को एक सर्किट से जोड़ने की जरूरत महसूस की जा रही है। सर्किट बनने से परिवहन, पार्किंग, भोजन, गाइड और ठहरने जैसी सुविधाओं को भी बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकेगा। इससे पर्यटकों का बस्तर में ठहराव बढ़ेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। बढ़ती पर्यटक आमद ने अब बस्तर के पर्यटन विकास में सुविधाओं के विस्तार की जरूरत को भी सामने ला दिया है।
सौर ऊर्जा पर शोध से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान
जगदलपुर. बस्तर की प्रतिभा ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। जगदलपुर निवासी सौरभ मोतीवाला का सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रदर्शन पर किया गया शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। चार साल से अधिक समय तक चले अध्ययन में गुजरात के 50 बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों का विश्लेषण किया गया। इन संयंत्रों की कुल क्षमता करीब 659 मेगावाट बताई गई है। शोध में वर्ष 2020 से 2024 के बीच वास्तविक बिजली उत्पादन और संयंत्रों के प्रदर्शन का अध्ययन किया गया। अध्ययन में कुछ परियोजनाएं अपेक्षा से कमजोर, कुछ सामान्य और कई बेहतर प्रदर्शन करती मिलीं। वहीं 28 परियोजनाओं में समय के साथ प्रदर्शन में गिरावट की प्रवृत्ति भी सामने आई। शोध में सौर संसाधनों से जुड़े अलग-अलग आंकड़ों की सटीकता का भी तुलनात्मक अध्ययन किया गया। संयंत्रों का क्षमता उपयोग करीब 15 से 16 प्रतिशत के आसपास पाया गया। पीएचडी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में किया गया यह अध्ययन सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए उपयोगी माना जा रहा है। इस उपलब्धि से बस्तर के युवाओं की शैक्षणिक और शोध प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है।
खेतों का डिजिटल रिकॉर्ड बदलेगा कृषि व्यवस्था
जगदलपुर. बस्तर संभाग में खेती से जुड़े आंकड़ों को अब तकनीक के जरिए ज्यादा सटीक बनाने की कवायद शुरू हो गई है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत खेत की जियो-लोकेशन के साथ बोई गई फसल और उसके रकबे का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। संभाग के सात जिलों में अब तक धान का कुल रकबा 1,54,488.179 हेक्टेयर दर्ज किया गया है। इसमें कांकेर 66,571.341 हेक्टेयर के साथ सबसे आगे है। कोंडागांव में 34,489.070 और बस्तर में 30,522.286 हेक्टेयर धान का रकबा दर्ज है। बीजापुर में 9,886.216, सुकमा में 5,846.649 हेक्टेयर धान दर्ज किया गया है। वहीं नारायणपुर में 5,062.022 और दंतेवाड़ा में 2,110.595 हेक्टेयर रकबा दर्ज हुआ है। डिजिटल सर्वे से कागजों में दर्ज आंकड़ों और खेत की वास्तविक स्थिति का अंतर सामने लाने में मदद मिलेगी। फसल खराब होने की स्थिति में नुकसान का आकलन और फसल बीमा का दावा भी अधिक सटीक हो सकेगा। सरकार को खाद, बीज, राहत और कृषि योजनाओं की योजना बनाने में वास्तविक आंकड़े मिल सकेंगे। तकनीक आधारित यह व्यवस्था कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ किसानों तक योजनाओं की पहुंच बेहतर करने में मदद कर सकती है।
नक्सल डंप से 2 टिफिन बम समेत विस्फोटक बरामद
सुकमा। जिले के कोंटा थाना क्षेत्र में सर्चिग पर निकले सुरक्षाबलों ने ग्राम बेलपोच्चा से गोमपाड़ जाने वाले मार्ग के समीप जंगल और पहाड़ी इलाके में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए डंप से दो टिफिन बम समेत बड़ी मात्रा में विस्फोटक और नक्सली उपयोगी सामग्री बरामद की। दोनों टिफिन बम वायर रहित अवस्था में मिले हैं, जिनका कुल वजन करीब 8 किलो है। पुलिस के मुताबिक आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली इंटेलिजेंस के आधार पर बेलपोच्चा-गोमपाड़ मार्ग के आसपास नक्सली डंप होने की सूचना मिली थी। इसके बाद 30 अगस्त को जिला बल, डीआरजी और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने इलाके में एरिया डोमिनेशन और सर्चिग अभियान शुरू किया। रविवार की सुबह करीब 11 बजे जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में सर्चिग के दौरान जवानों को संदिग्ध डंप मिला। जांच करने पर इसमें विस्फोटक सामग्री और नक्सलियों के उपयोग में आने वाली अन्य सामग्री बरामद हुई। इनमें 5 किलो और 3 किलो वजन के दो टिफिन बम, कुल 8 किलो, शामिल हैं। इसके अलावा 4 बंडल कोडेक्स वायर, 10 डेटोनेटर, 17 जिलेटिन, एक बंडल फ्यूज वायर और तीन बंडल बिजली वायर भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि टिफिन बम वायर रहित अवस्था में थे। डंप से दो स्टील टिफिन, दो प्लास्टिक डस्टबिन, एक बैटरी समेत अन्य नक्सली उपयोगी सामग्री भी बरामद हुई है। पुलिस के अनुसार प्लास्टिक डस्टबिन में बिजली वायर भरा हुआ था। बरामद सामग्री को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लेकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मदद के साथ आत्मनिर्भर बनाने की पहल
सुकमा. नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए मदद अब केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहने वाली है। मातंगी धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेम साई गुरुजी ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी जरूरतों को जाना। जगरगुंडा क्षेत्र के बेनपल्ली पटेलपारा निवासी मुचाकी रामा की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। उनके परिवार से मुलाकात कर बेटे किशोर की आगे की शिक्षा के लिए 51 हजार रुपए की सहायता दी गई। साथ ही किशोर को वुडन कार्य का प्रशिक्षण दिलाकर रोजगार से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इसी तरह चिंतलनार क्षेत्र की 14 वर्षीय मड़कम सुक्की आईईडी की चपेट में आकर अपना एक पैर गंवा चुकी है। सुक्की के परिवार को घर की मरम्मत के लिए 51 हजार रुपए की तत्काल सहायता दी गई। उसके भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री से सहयोग दिलाने का प्रयास करने की बात भी कही गई है। सुक्की को नौकरी मिलने तक एक वर्ष के लिए हर महीने 31 हजार रुपए की सहयोग राशि देने की घोषणा की गई है। पहल का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के साथ शिक्षा और कौशल के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए यह सहायता भविष्य में अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में अहम कदम बन सकती है।

सड़क हादसे में समय पर मदद बनी राहत
कोंडागांव. जिले में सड़क हादसे के बाद समय पर मिली मदद ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। फरसगांव क्षेत्र में एनएच-30 पर दो बाइक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दो बच्चों समेत पांच लोग घायल हो गए। घटना के बाद फरसगांव सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को तत्काल फरसगांव अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में राजेश मरकाम के पैर में गंभीर चोट आई, जबकि कृष्णा भी गंभीर रूप से घायल हुआ। सविता, किरण और विवेक को भी चोटें आईं, हालांकि उनकी स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य बताई गई। गंभीर रूप से घायल दोनों लोगों को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। सड़क सुरक्षा समिति का काम केवल जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं है। दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान और हादसे के समय घायलों को तत्काल मदद पहुंचाना भी इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। फरसगांव की घटना ने दिखाया कि दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ मिनटों में मिलने वाली मदद घायल की स्थिति के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
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