Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर संभाग में लंबे समय से लंबित एनआईए मामलों के निपटारे की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार ने जगदलपुर में एनआईए स्पेशल कोर्ट शुरू करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह अदालत बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर और कोंडागांव के मामलों की सुनवाई करेगी. स्पेशल कोर्ट की जिम्मेदारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश संगीता नवीन तिवारी को सौंपी गई है. बताया जा रहा है कि क्षेत्र के 21 मामले विचाराधीन हैं जबकि 100 से अधिक मामले रिमांड स्तर पर हैं.

अब इन मामलों की लगातार सुनवाई संभव हो सकेगी. झीरम घाटी हमला और भीमा मंडावी हत्याकांड जैसे चर्चित मामलों की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है. अब तक सुनवाई के लिए रायपुर और अन्य न्यायालयों पर निर्भरता रहती थी. स्थानीय स्तर पर कोर्ट शुरू होने से कानूनी प्रक्रिया को गति मिलेगी. अभियोजन और बचाव पक्ष के लिए भी अलग-अलग अधिवक्ताओं की नियुक्ति कर दी गई है. जून और जुलाई में कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई प्रस्तावित है. इस फैसले को बस्तर में न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.   

फरसगांव उपचुनाव में लोगों ने बढ़-चढ़कर किया मतदान

कोंडागांव. फरसगांव नगर पंचायत के दो वार्डों में हुए उपचुनाव ने मतदाताओं की सक्रियता की नई मिसाल पेश की है. वार्ड क्रमांक 1 और 12 में मतदान प्रतिशत 87 से 90 फीसदी के बीच दर्ज किया गया. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं. वार्ड 12 में महिला मतदाताओं का विशेष उत्साह नजर आया. मतदान के दौरान एक समय राजनीतिक समर्थकों के बीच हल्की नोकझोंक हुई. हालांकि प्रशासन और पुलिस ने तत्काल स्थिति संभाल ली. पूरा मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया. निर्वाचन अधिकारियों ने लगातार केंद्रों का निरीक्षण किया..मतदान समाप्त होने के बाद ईवीएम को कड़ी सुरक्षा में स्ट्रांग रूम में रखा गया. अब सभी की नजरें मतगणना और परिणामों पर टिकी हैं. कम आबादी वाले वार्डों में इतना अधिक मतदान स्थानीय मुद्दों के प्रति जागरूकता दर्शाता है. उपचुनाव के नतीजे क्षेत्र की राजनीतिक दिशा का संकेत भी देंगे.

111 साल पुराना कुआं, जो कभी शहर की प्यास बुझाता था, आज खुद संरक्षण की आस में

जगदलपुर. जगदलपुर में जल संकट की चर्चा के बीच शहर का एक ऐतिहासिक जल स्रोत फिर सुर्खियों में है. 111 साल पुराना वह विशाल कुआं, जिससे कभी करीब 600 घरों तक पेयजल पहुंचता था, आज उपेक्षा का शिकार बना हुआ है. दलपत सागर के किनारे स्थापित इस व्यवस्था ने दशकों तक नगरवासियों की प्यास बुझाई थी. 1916 में स्थापित फिल्टर प्लांट के जरिए कुएं का पानी शुद्ध कर घर-घर भेजा जाता था.

1962 तक यह व्यवस्था संचालित रही, लेकिन इंद्रावती नदी से नई जलापूर्ति शुरू होने के बाद कुएं का उपयोग बंद हो गया. आज भी कुआं पानी से लबालब भरा है, लेकिन उसके उपयोग की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती. कभी जल संरक्षण का प्रतीक रहा यह ढांचा अब बदहाली और उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है. शहर के कई पुराने कुएं भी सफाई और रखरखाव के अभाव में कूड़ादान में तब्दील हो चुके हैं.

स्थानीय लोग लंबे समय से इस कुएं का उपयोग निस्तारी और अन्य जरूरतों के लिए शुरू करने की मांग कर रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि जल संकट के दौर में ऐसे पारंपरिक स्रोतों का संरक्षण जरूरी है. सवाल यह है कि जब पानी मौजूद है तो उसका उपयोग क्यों नहीं हो रहा. कभी शहर की जीवनरेखा रहा यह कुआं अब पुनर्जीवन की प्रतीक्षा कर रहा है.

सुरक्षा कैंप से सेवा केंद्र तक, बस्तर के लिए नया विकास मॉडल

सुकमा. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा की रणनीति अब विकास की दिशा में बदलती दिखाई दे रही है. सुकमा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर के लिए नए विकास रोडमैप की जानकारी दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण कई इलाके विकास से वंचित रहे. अब सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर विशेष फोकस किया जाएगा. उन्होंने बताया कि वर्तमान में संचालित करीब 200 सुरक्षा कैंपों में से 70 को “सेवा डेरा” में बदला जाएगा. इन केंद्रों में कौशल विकास, स्वरोजगार और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई और स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आय बढ़ाने की योजना है. सरकार का दावा है कि बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की दिशा में काम हो रहा है. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जैसी सुविधाओं से स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी. नक्सल प्रभावित इलाकों में अब सुरक्षा के साथ विकास का मॉडल लागू करने की तैयारी है. यानी जहां कभी बंदूक की चर्चा थी, वहां अब रोजगार और विकास की बात हो रही है.  

एक तूफान और थम गई रफ्तार, सीआरपीएफ कैंप से गांवों तक भारी नुकसान

सुकमा. तोंगपाल क्षेत्र में आए तेज तूफान और मूसलाधार बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है. आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के कारण पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई. सबसे ज्यादा नुकसान सीआरपीएफ की 227वीं बटालियन के मुख्यालय को हुआ है. कई विशाल पेड़ उखड़कर भवनों और कार्यालय परिसरों पर गिर गए. सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचने के साथ संचार सेवाएं भी प्रभावित हुईं. झीरम घाटी, कोमाकोलेंग और अन्य समवाय भी तूफान की चपेट में आए. घटना के बाद प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया राहत और पुनर्स्थापना कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया है. कर्मचारी और जवान क्षतिग्रस्त परिसरों को सामान्य बनाने में जुटे हैं. तूफान ने एक बार फिर मानसून पूर्व मौसम की चुनौती सामने रख दी है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली और संचार सेवाओं को बहाल करने का प्रयास जारी है. फिलहाल पूरे क्षेत्र में नुकसान का आकलन किया जा रहा है.   

जंगल कटते रहे, कार्रवाई पर उठे सवाल

बकावंड. मैलबेड़ा के जंगलों में कथित अवैध कटाई का मामला ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक महीने से बाहरी लोग जंगल में लकड़ी काट रहे थे. सूचना मिलने पर वन विभाग ने मौके से आरा मशीन जब्त की. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कटाई में शामिल लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी बात को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का दावा है कि समय रहते कार्रवाई होती तो नुकसान रोका जा सकता था. मामले में कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका की भी चर्चा की जा रही है. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. जंगल समिति के पदाधिकारियों ने भी मामले की शिकायत अधिकारियों से की है. ग्रामीण अब उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वन संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ऐसे में अवैध कटाई चिंता का विषय बन रही है. एसडीएम ने मामले की जानकारी लेकर जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है.  

तेंदूपत्ता संग्राहकों को 12 करोड़ का भुगतान

बीजापुर. तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े हजारों परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. जिले में संग्रहण सीजन 2026 के तहत 40 हजार से अधिक संग्राहकों ने तेन्दूपत्ता संग्रहित किया. इसके बदले करीब 36 करोड़ रुपये पारिश्रमिक का भुगतान किया जाना है. पहले चरण में 12 हजार से अधिक संग्राहकों के खातों में 12 करोड़ रुपये ऑनलाइन भेजे गए हैं. मानसून से पहले भुगतान मिलने से खेती-किसानी की तैयारियों को बल मिलेगा. ग्रामीण परिवार इस राशि का उपयोग कृषि कार्यों और घरेलू जरूरतों में करते हैं. गुडमा, कुटरू, तोयनार और बरदेला समेत कई समितियों के संग्राहकों को भुगतान मिल चुका है. शेष समितियों में सत्यापन और ऑनलाइन प्रविष्टि का काम जारी है. सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया है. सीधे बैंक खातों में राशि पहुंचने से पारदर्शिता भी बढ़ी है. तेन्दूपत्ता आज भी बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है. इस भुगतान से हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है.      

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महिला के अंतिम संस्कार को लेकर 6 घंटे तक चला विवाद

सुकमा. कोंटा ब्लॉक के बरेंमोगा गांव में एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की स्थिति बन गई. मृतिका के परिजन ईसाई परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहते थे. वहीं गांव के कई लोगों ने आदिवासी रीति-रिवाजों के पालन की मांग की.शव गांव पहुंचते ही दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ गया. करीब छह घंटे तक गांव में तनावपूर्ण माहौल बना रहा. स्थिति की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे..अधिकारियों ने दोनों पक्षों से अलग-अलग चर्चा कर समाधान का प्रयास किया. लगातार समझाइश और बातचीत के बाद सहमति का रास्ता निकला. अंततः मृतिका का अंतिम संस्कार आदिवासी परंपरा के अनुसार कराया गया. प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखी. इस मामले ने ग्रामीण समाज में परंपरा और व्यक्तिगत आस्था के बीच संतुलन की चुनौती को सामने रखा. संवाद और सहमति के जरिए विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला गया.

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