Bastar News Update : जगदलपुर. भारतीय ग्रामीण डाक कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है. 20 जुलाई से कर्मचारी पहले चरण में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे. यह अभियान राष्ट्रव्यापी संघर्ष कार्यक्रम का हिस्सा बताया गया है. 20 से 27 जुलाई तक सभी कर्मचारी विरोध स्वरूप कार्य करते रहेंगे. इसके बाद 28 जुलाई को भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन किया जाएगा. यदि मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो 5 अगस्त को एक दिवसीय हड़ताल होगी. इसके बाद 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है. संघ ने रिक्त पदों पर भर्ती और कर्मचारियों के शोषण पर रोक की मांग उठाई है. रेल डाक सेवा को मजबूत करने सहित कई अन्य मांगें भी प्रमुख हैं. संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित मुद्दों पर अब निर्णायक समाधान जरूरी है. आंदोलन के पहले चरण में काम प्रभावित नहीं होगा, लेकिन विरोध लगातार जारी रहेगा. अब सभी की नजर सरकार और विभाग की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है.

बाढ़ प्रभावितों को 1 साल बाद भी स्थायी ठिकाने का इंतजार

जगदलपुर. 26 अगस्त 2025 की भयावह बाढ़ को मांदर गांव आज भी नहीं भूल पाया है. लोहण्डीगुड़ा के नानी बहार नाले की तबाही ने दर्जनों परिवारों का आशियाना उजाड़ दिया था. सालभर बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि विस्थापन आखिर क्यों अटका हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने जमीन तो चिन्हित की, लेकिन वह उनकी जरूरतों के अनुरूप नहीं थी. आरोप है कि कई प्रभावितों के नाम पर अलग-अलग भूखंड आवंटित नहीं किए गए. दूरस्थ स्थान और बरसात में आवागमन की दिक्कत भी लोगों के फैसले में बड़ी बाधा बनी. कई परिवारों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका है, इसलिए पुश्तैनी जमीन छोड़ना आसान नहीं. कुछ लोगों को मुआवजा मिला, लेकिन संयुक्त परिवारों में सभी प्रभावितों को समान राहत नहीं मिल सकी. अब अधिकांश परिवार अपनी जमीन पर ही ऊंची जगह पर नए मकान बना रहे हैं. वहीं नाले किनारे बसे कई घरों में दरारें पड़ने से नई चिंता भी सामने आ गई है. ग्रामीण चाहते हैं कि पुनर्वास ऐसा हो, जिससे खेती भी बची रहे और भविष्य में बाढ़ का खतरा भी कम हो. सवाल यही है कि आपदा के बाद राहत तो मिली, लेकिन स्थायी समाधान कब मिलेगा?  

बस्तर में मलेरिया ने बढ़ाई टेंशन

जगदलपुर. बारिश शुरू होते ही बस्तर में मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है. सबसे बड़ी चुनौती वे मरीज हैं, जिन्हें खुद भी बीमारी का पता नहीं चलता. विभाग के अनुसार करीब 40 प्रतिशत संक्रमितों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते. यही कारण है कि संक्रमण चुपचाप एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच रहा है. जनवरी से मई 2026 के बीच जिले में 617 मलेरिया मरीज सामने आए. इनमें 506 मरीज घातक पीएफ और 111 पीवी मलेरिया से संक्रमित पाए गए. लोहण्डीगुड़ा, बड़ेकिलेपाल और दरभा सबसे संवेदनशील क्षेत्र बने हुए हैं. एक मरीज मिलने पर स्वास्थ्य टीम आसपास के करीब 50 घरों में जांच अभियान चला रही है. 15 जून से 15 जुलाई तक चले विशेष सर्वे में भी 299 नए मरीज मिले हैं. स्वास्थ्य विभाग मच्छरदानी के नियमित उपयोग और बुखार होने पर तत्काल जांच कराने की अपील कर रहा है. बारिश के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही संक्रमण की बड़ी वजह बन सकती है. इस बार लक्ष्य केवल इलाज नहीं, बल्कि छिपे हुए संक्रमितों की पहचान भी है.

अपराध पर सख्ती, अब हर रविवार थाने में लगेगी आदतन अपराधियों की हाजिरी

जगदलपुर. शहर में कानून व्यवस्था मजबूत करने के लिए बोधघाट थाना पुलिस ने नई रणनीति अपनाई है. आदतन अपराधियों पर निगरानी बढ़ाते हुए उन्हें नियमित हाजिरी के दायरे में लाया गया है. दर्जनभर निगरानी बदमाशों को हर रविवार थाने में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं. सभी की काउंसलिंग कर भविष्य में अपराध से दूर रहने की चेतावनी दी गई. पुलिस ने स्पष्ट किया कि गुंडागर्दी और नशाखोरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं होगी. इन लोगों पर पहले से मारपीट, लूट, चाकूबाजी और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं. साथ ही अवैध हथियार, बलवा और जुआ-सट्टा जैसे मामलों में भी इनका रिकॉर्ड रहा है. प्रशासन का कहना है कि कानून तोड़ने वालों पर लगातार नजर रखी जाएगी. हाजिरी व्यवस्था का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं बल्कि अपराध की पुनरावृत्ति रोकना भी है. आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. पुलिस का मानना है कि ऐसी पहल से क्षेत्र में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा. अब देखना होगा कि यह सख्ती शहर में कितना बदलाव ला पाती है.

नारायणपुर – परंपरा बनाम धर्मांतरण की बहस के बीच ‘घर वापसी’ का मामला चर्चा में

नारायणपुर. नारायणपुर के सुलेंगा गांव में एक परिवार की ‘घर वापसी’ को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. ग्रामीणों के अनुसार परिवार के चार सदस्यों ने पारंपरिक आदिवासी आस्था में लौटने का निर्णय लिया. गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किए जाने की जानकारी सामने आई है. ग्राम प्रमुख का कहना है कि गांव में हर रविवार सामाजिक बैठक आयोजित की जाती है. इन बैठकों में संस्कृति, परंपरा और सामाजिक विषयों पर चर्चा होती है. ग्रामीणों का दावा है कि लोगों को अपनी पारंपरिक पहचान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं कुछ सामाजिक संगठनों का आरोप है कि ग्रामीणों को प्रभावित कर धर्मांतरण कराया जाता है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र या प्रशासनिक पुष्टि सामने नहीं आई है. नारायणपुर में यह मुद्दा लंबे समय से सामाजिक बहस का हिस्सा रहा है. अंतिम संस्कार और दफन स्थल जैसे विषयों को लेकर भी पहले विवाद सामने आते रहे हैं. पूरे घटनाक्रम ने फिर एक बार संस्कृति, आस्था और सामाजिक संतुलन पर चर्चा तेज कर दी है. अब सभी की नजर इस पर है कि आगे प्रशासन और समाज की भूमिका क्या रहती है.

कच्चापाल वाटरफॉल में पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल

नारायणपुर. अबूझमाड़ का कच्चापाल वाटरफॉल इन दिनों पर्यटकों से गुलजार है. लेकिन रविवार की घटना ने पर्यटन सुरक्षा की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. झरने के पास अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने पर्यटकों पर हमला कर दिया. घटना के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग जंगल व चट्टानों की ओर भागे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोग आग जलाकर भोजन बना रहे थे. साथ ही तेज आवाज में स्पीकर भी बजाया जा रहा था. बताया जा रहा है कि धुएं और शोर के बीच मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं. गनीमत रही कि किसी बड़ी जनहानि की सूचना सामने नहीं आई. घटना के बाद प्राथमिक उपचार और आपातकालीन व्यवस्था की कमी भी उजागर हुई. विशेषज्ञ प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा नियमों और जागरूकता की जरूरत बता रहे हैं. पर्यटन बढ़ रहा है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था भी उसी गति से मजबूत होना जरूरी है. कच्चापाल की घटना भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है.  

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