Bastar News Update : कांकेर. बस्तर की बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना अब नए चरण में प्रवेश करती नजर आ रही है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने भानुप्रतापपुर-रावघाट रेलखंड का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की समीक्षा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि रावघाट तक रेल परिचालन जल्द शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. इसके बाद रावघाट से जगदलपुर तक लगभग 140 किलोमीटर रेल लाइन विस्तार को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. रेल मंत्रालय इस परियोजना को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रहा है. अधिकारियों को निर्माण कार्य में गति लाने और गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए.यह परियोजना बस्तर की यातायात व्यवस्था और औद्योगिक विकास के लिए अहम मानी जा रही है. रेल संपर्क बढ़ने से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी खुलने की उम्मीद है. स्थानीय लोगों को लंबे समय से इस रेल लाइन का इंतजार रहा है. अब निरीक्षण के बाद परियोजना को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं. बस्तर को देश के प्रमुख रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. रेल विस्तार से क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलने की संभावना जताई जा रही है.
विकास संवाद में शिक्षा, आदिवासी उत्थान और आत्मनिर्भरता पर रहा फोकस
जगदलपुर. बस्तर मुख्यालय में आयोजित विशेष मीडिया संवाद कार्यशाला में विकास और सुशासन के मुद्दे केंद्र में रहे. केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि शिक्षा और विकास सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही सुशासन का लक्ष्य है. बस्तर को नक्सलवाद से विकास की ओर बढ़ते क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया. सांसद महेश कश्यप ने आदिवासी समाज के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई. कार्यशाला में गरीब कल्याण, आवास, मुफ्त राशन और वित्तीय समावेशन की योजनाओं की जानकारी साझा की गई. जनधन खाते, बीमा योजनाएं और ग्रामीण आवास निर्माण की उपलब्धियां भी गिनाई गईं. मिलेट्स उत्पादन में बस्तर के आदिवासी किसानों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया. रेल, सड़क, हवाई सेवा और पर्यटन विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही. वक्ताओं ने बदलते बस्तर को विकास के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया. संवाद का संदेश स्पष्ट रहा कि अब बस्तर की पहचान विकास और आत्मनिर्भरता से बनेगी.
कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी की पोल खुली, प्रशासन ने दिखाई सख्ती
जगदलपुर. देशभर में हुई अग्निकांड की घटनाओं के बाद बस्तर प्रशासन सतर्क नजर आया. अग्निशमन विभाग ने स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया. जांच में अधिकांश संस्थानों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई. कई बहुमंजिला भवनों में आपातकालीन निकास तक की व्यवस्था नहीं मिली. कुछ जगह केवल औपचारिकता के लिए अग्निशमन यंत्र रखे गए थे. धरमपुरा क्षेत्र के एक भवन में कई कोचिंग सेंटर संचालित होने पर भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिली. रोजाना सैकड़ों छात्र इन भवनों में पढ़ाई करने पहुंचते हैं. अधिकारियों ने संचालकों को कड़ी फटकार लगाते हुए सुरक्षा व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए. नियमित मॉक ड्रिल और भवन सुरक्षा पर भी जोर दिया गया. अभिभावकों ने छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने की मांग की है. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अब सभी संस्थानों की निगरानी और जांच आगे भी जारी रहेगी.
20 साल से अधूरा पुल, हर बारिश में 50 गांवों की बढ़ जाती है परेशानी
जगदलपुर. गोरियाबहार नाले पर उच्च स्तरीय पुल की मांग दो दशक बाद भी अधूरी है. लालबाग चौक से माड़पाल-नगरनार मार्ग को जोड़ने वाला यह रास्ता हर बारिश में बाधित हो जाता है. इंद्रावती नदी के बैकवॉटर से पुराना पुल डूबने पर आवाजाही पूरी तरह प्रभावित होती है. करीब 50 गांवों के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है. दो किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए सात किलोमीटर घूमना मजबूरी बन जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार लोग और वाहन तेज बहाव में बह चुके हैं. लंबे समय से उच्च स्तरीय पुल की मांग की जा रही है, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया. व्यस्त मार्ग होने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है. बरसात के दिनों में स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों ने जल्द स्थायी समाधान की मांग दोहराई है. उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, निर्माण कार्य शुरू होना चाहिए. लोगों को उम्मीद है कि इस बार उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी.
पर्यटन गांव 16 दिन अंधेरे में, बिजली संकट से ठप हुई सैलानियों की आवाजाही
जगदलपुर. विश्व प्रसिद्ध धूड़मारास गांव में बिजली संकट ने पर्यटन व्यवस्था को प्रभावित कर दिया. कांगेर घाटी क्षेत्र के चार गांव लगातार 16 दिनों तक अंधेरे में डूबे रहे. आंधी-पानी में बिजली लाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद लंबे समय तक सुधार कार्य नहीं हुआ. इस दौरान धूड़मारास, पेदावाड़ा, मांझीपाल और कोटमसर के ग्रामीण परेशान रहे. देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी प्रभावित हुए. स्थानीय पर्यटन गतिविधियां लगभग ठप हो गईं. ग्रामीणों ने बिजली केंद्र पहुंचकर विरोध दर्ज कराया, तब जाकर आपूर्ति बहाल हुई..पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा. स्थानीय संचालकों का कहना है कि बिजली नहीं होने से कोई पर्यटक ठहर नहीं पाया. विश्व स्तर पर पहचान रखने वाले गांव में मूलभूत सुविधा की कमी सवाल खड़े कर रही है. ग्रामीणों ने भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने की मांग की है. पर्यटन क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है.
ट्रक ड्राइवर सुसाइड केस में मर्सिडीज चालक गिरफ्तार
दंतेवाड़ा. बंजारिन घाटी सड़क हादसे के बाद सामने आए आत्महत्या मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. ट्रक चालक को कथित प्रताड़ना और धमकी देने के आरोपी मर्सिडीज चालक को गिरफ्तार किया गया है. हादसे के बाद विवाद बढ़ने पर चालक पर गाली-गलौज, मारपीट और धमकी देने के आरोप लगे थे. मानसिक तनाव में आए ट्रक चालक ने अगले दिन आत्महत्या कर ली थी. मृतक ने घटना से पहले सोशल मीडिया पर वीडियो भी साझा किए थे. पुलिस ने वीडियो, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जांच में शामिल किया. गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया. आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है. मामले की जांच अभी जारी है. पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है. डिजिटल साक्ष्यों ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है. घटना ने सड़क विवादों में बढ़ती आक्रामकता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
जमीन की कमी से उद्योग निवेश अटका, एमओयू के बाद भी नहीं बढ़ सकी परियोजनाएं
जगदलपुर. बस्तर में औद्योगिक विकास की संभावनाएं जमीन की उपलब्धता पर अटक गई हैं. खनिज, वन और कृषि आधारित उद्योगों के लिए निवेशकों ने रुचि दिखाई थी. नगरनार स्टील प्लांट के आसपास सहायक उद्योग स्थापित करने की भी योजना बनी थी. कई उद्योग समूहों ने राज्य सरकार के साथ एमओयू किए, लेकिन परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं. सबसे बड़ी बाधा उद्योगों के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता बनी हुई है. कुछ स्थानों पर ग्रामीणों के विरोध के कारण प्रक्रिया रुक गई. निजी जमीन की तलाश भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी. दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी सहायक उद्योगों में अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि संबंधी समाधान के बिना निवेश प्रभावित रहेगा. उद्योग लगने से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है. अब सरकार से भूमि उपलब्ध कराने के लिए ठोस पहल की उम्मीद की जा रही है. बस्तर के औद्योगिक भविष्य के लिए यह चुनौती निर्णायक मानी जा रही है.
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

