Bastar News Update : जगदलपुर शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का बड़ा सवाल बन गई है। धरमपुरा मार्ग से लेकर कुम्हरावंड तक शाम होते ही सड़कें मवेशियों के कब्जे में नजर आती हैं। रोजाना वाहन चालकों को अचानक सामने बैठे मवेशियों से बचते हुए गुजरना पड़ रहा है। बीते महीनों में कई दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। नगर निगम का मवेशी पकड़ो अभियान फिलहाल धीमा पड़ गया है। कांजी हाउस होने के बावजूद उसका प्रभावी संचालन नहीं हो पा रहा।
गौ अभ्यारण्य योजना की घोषणा अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है। बजरंग दल लगातार स्थायी व्यवस्था और गौ अभ्यारण्य शुरू करने की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि घायल मवेशियों का उपचार भी स्वयंसेवकों को कराना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण दोनों के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है। प्रशासन की अगली पहल पर अब लोगों की नजर टिकी हुई है। फिलहाल शहर की सड़कें हर शाम हादसों का इंतजार करती दिखाई दे रही हैं।
शिक्षा विभाग का सख्त संदेश, आदेश नहीं माना तो सेवा रिकॉर्ड पर पड़ेगा असर
बस्तर। शिक्षा विभाग ने संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद अनुशासन लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट कर दिया है कि मूल पदस्थापना स्थल पर नहीं लौटने वालों पर कार्रवाई होगी। निर्धारित समय में कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले कर्मचारियों पर ब्रेक इन सर्विस का प्रस्ताव भेजा जाएगा। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संयुक्त संचालकों को सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना भी अनिवार्य बताया गया था। इसके बावजूद कई कर्मचारियों द्वारा निर्देशों का पालन नहीं किया गया। अब ऐसे मामलों में विभाग नरमी के मूड में नहीं है। ब्रेक इन सर्विस का असर वेतन, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शासन के आदेशों की अनदेखी स्वीकार नहीं होगी। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। कर्मचारियों को समय रहते नियमों का पालन करने की चेतावनी दी गई है। अब पूरी नजर जिला स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।
नक्सल हिंसा घटी तो हत्या के आंकड़े भी गिरे, बदलती तस्वीर का संकेत
बस्तर संभाग में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने का असर अब अपराध के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। हत्या जैसे गंभीर मामलों में कई जिलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई है। बीजापुर में हत्या के मामले 49 से घटकर 33 रह गए हैं। सुकमा में आंकड़ा 33 से घटकर 16 तक पहुंच गया। कांकेर में भी मामलों की संख्या 30 से घटकर 19 हो गई। नारायणपुर में हत्या के केस 15 से घटकर केवल 9 रह गए।
कोंडागांव में लगातार दूसरे वर्ष आंकड़ा 13 पर स्थिर बना हुआ है। विशेषज्ञ इसे सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी और विकास कार्यों का असर मान रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी मजबूत हुआ है। हालांकि कानून व्यवस्था बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती है। प्रशासन का दावा है कि शांति और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। बदलते आंकड़े बस्तर की नई तस्वीर की ओर इशारा कर रहे हैं।
जिला बना, लेकिन सब-रजिस्ट्रार नहीं; अब स्थायी नियुक्ति की मांग तेज
नारायणपुर में नियमित सब-रजिस्ट्रार की नियुक्ति का मुद्दा फिर जोर पकड़ने लगा है। वर्तमान में तहसीलदार अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। राजस्व और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण पंजीयन कार्य प्रभावित होता है। भूमि खरीदी-बिक्री सहित कई जरूरी दस्तावेज समय पर दर्ज नहीं हो पाते। जनप्रतिनिधियों ने सरकार से स्थायी अधिकारी नियुक्त करने की मांग उठाई है। दलील दी जा रही है कि इससे शासन के राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। सुझाव दिया गया है कि फिलहाल जगदलपुर से अतिरिक्त अधिकारी संलग्न किया जाए। स्थायी व्यवस्था होने तक इससे लोगों को राहत मिल सकती है।
जिला बनने के वर्षों बाद भी अलग पद स्वीकृत नहीं होना सवाल खड़े कर रहा है। नागरिकों को बार-बार इंतजार और परेशानी झेलनी पड़ रही है। अब लोगों को सरकार के फैसले का इंतजार है। देखना होगा कि यह मांग कब तक पूरी होती है।
‘आगाज’ अभियान में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 10.7 किलो गांजा जब्त
सुकमा पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। कोंटा क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया। आरोपी ओडिशा के मलकानगिरी से गांजा लेकर तेलंगाना जा रहे थे। पुलिस ने घेराबंदी कर बिना नंबर की एक्टिवा स्कूटी को पकड़ा। तलाशी में 10.700 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। बरामद मादक पदार्थ की कीमत करीब 5.35 लाख रुपये बताई गई है। स्कूटी समेत कुल जब्ती 6.73 लाख रुपये की हुई। दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के कारोबार पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। लोगों से भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील की गई है। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने का भरोसा दिया गया है। अभियान के तहत आगे भी कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।
खेत में काम बना आखिरी सफर, आकाशीय बिजली ने ली किसान की जान
कोंडागांव। मानसून के बीच कोंडागांव जिले से दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। बानगांव में धान की बुआई के दौरान किसान पर आकाशीय बिजली गिर गई। घटना में किसान की मौत हो गई, जबकि उसका पुत्र बच गया। दोनों खेत में काम कर रहे थे तभी अचानक मौसम बदल गया। ग्रामीणों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने किसान को मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बारिश के मौसम में लगातार बिजली गिरने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञ खराब मौसम में खुले खेतों से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। कृषि कार्य के दौरान सतर्कता बरतना बेहद जरूरी बताया गया है। एक पल की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। यह हादसा मानसून में सुरक्षा के महत्व को फिर याद दिला गया।
सड़क नहीं बनी तो सड़क पर उतरे ग्रामीण, आश्वासन के बाद खुला जाम
कोंडागांव। कोर्रा से मारोकी तक अधूरी सड़क को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बस्तरिया राज मोर्चा के नेतृत्व में घंटों चक्का जाम किया गया। ग्रामीणों का कहना था कि खराब सड़क से मरीज, छात्र और आम लोग परेशान हैं। लंबे समय से निर्माण पूरा नहीं होने पर नाराजगी बढ़ती रही। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से चर्चा की। 15 दिनों के भीतर मरम्मत कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया गया। लिखित और मौखिक भरोसे के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
इधर विधानसभा में भी बड़ेडोंगर-कोनगुड़ा सड़क का मुद्दा गूंजा। सरकार ने जांच और जल्द स्वीकृति का भरोसा दिया है।
भारी वाहनों के कारण सड़क की हालत और बिगड़ने की बात कही गई। करीब 200 गांवों के लोग इस सड़क से प्रभावित बताए जा रहे हैं। अब लोगों की निगाह वादों के बजाय जमीन पर काम शुरू होने पर है।
राशन के लिए 120 किलोमीटर का सफर, दूरस्थ गांव की बेबसी उजागर
सुकमा जिले के नीलावाया गांव के ग्रामीण राशन की मांग लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि छह से सात महीने से दुकान में राशन नहीं पहुंचा। नई उचित मूल्य दुकान स्वीकृत होने के बावजूद वितरण शुरू नहीं हो सका। गांव से जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए पहले पैदल और फिर लंबा सफर तय करना पड़ता है। करीब 120 किलोमीटर की यात्रा कर ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर पहुंचे।
उनका कहना है कि कई शिकायतों के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। राशन नहीं मिलने से कई परिवार खाद्यान्न संकट का सामना कर रहे हैं। महंगे दामों पर बाजार से अनाज खरीदना उनकी मजबूरी बन गया है। ग्रामीणों ने तत्काल नियमित राशन वितरण शुरू कराने की मांग की है। खाद्य विभाग ने ई-केवाईसी और दुकान स्थानांतरण को समस्या की वजह बताया है। विभाग ने जल्द व्यवस्था सामान्य करने का भरोसा दिया है। अब दूरस्थ गांव के लोगों को राहत कब मिलेगी, इस पर सबकी नजर है।
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