Bastar News Update, सुकमा। धर्मांतरण के मुद्दे पर सुकमा जिले का पोलमपल्ली गांव एक बार फिर चर्चा में है। विवाद अब केवल धार्मिक मतभेद तक सीमित नहीं, बल्कि आदिवासी परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की पारंपरिक पूजा से पहले ही खेतों में जुताई और धान की बुआई की गई। इसी बात को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया।

आक्रोशित लोगों ने तीन परिवारों के घरों की छतें हटाकर उन्हें गांव छोड़ने की मांग की। हालात बिगड़ने पर पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। ग्रामीणों के साथ कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। गांव में रैली निकालकर धर्मांतरण के विरोध में नारेबाजी भी की गई। ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर विशेष ग्रामसभा बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतिम निर्णय ग्रामसभा में लिया जाए। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल गांव में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है।

20 साल बाद भी अधूरा ट्रामा सेंटर, गंभीर मरीजों की बढ़ी मुश्किल

जगदलपुर। बस्तर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल आज भी अधूरे ट्रामा सेंटर की समस्या से जूझ रहा है। भवन निर्माण शुरू हुए दो साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी। इसका सबसे बड़ा असर सड़क हादसों और गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को इलाज के लिए रायपुर रेफर करना पड़ता है।

करीब 300 किलोमीटर का सफर कई मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता है। कागजों में डॉक्टर, नर्स और तकनीकी स्टाफ की स्वीकृति मौजूद है। लेकिन अधूरी बिल्डिंग और संसाधनों की कमी से व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई। मानक ट्रामा सेंटर में 24 घंटे ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ डॉक्टर जरूरी होते हैं।

साथ ही सीटी स्कैन, ब्लड स्टोरेज और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों खर्च होने के बाद भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। अब लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाए।
ताकि बस्तर के मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके।

पुरानी मंडी बनेगी विकास का नया केंद्र, 12 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया

जगदलपुर। शहर की वर्षों से खाली पड़ी पुरानी कृषि उपज मंडी को नई पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है। मंडी को आधुनिक कृषक बाजार में बदलने के लिए 12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। कोपागुड़ा में नई मंडी शुरू होने के बाद पुराना परिसर लंबे समय से बेकार पड़ा है। यहां बने 29 गोदाम भी उपयोग का इंतजार कर रहे हैं। योजना के तहत कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए नया बाजार विकसित किया जाएगा। गोदामों में कृषि यंत्र और उपकरणों का व्यापार भी शुरू करने की तैयारी है।

स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस परिसर के बेहतर उपयोग की मांग कर रहे हैं। कुछ लोग यहां बैंक कॉम्प्लेक्स बनाने की भी मांग उठा चुके हैं। वहीं बड़े प्रेक्षागृह की जरूरत भी लगातार महसूस की जा रही है। पहले भेजे गए प्रस्ताव पर काम नहीं हो सका था। अब नई योजना से लोगों को उम्मीद जगी है। अंतिम फैसला प्रदेश सरकार की मंजूरी के बाद होगा।

जंगलों के बीच पहली बार जली रोशनी, कार्लाकोंटा में बदली तस्वीर

बस्तर। लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक के दूरस्थ गांव कार्लाकोंटा में अब बिजली पहुंच चुकी है। घने जंगलों के बीच बसे इस गांव के 43 परिवार पहली बार बिजली से जुड़े हैं। वर्षों से अंधेरे में जीवन बिताने वाले ग्रामीणों के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है। बच्चों को अब रात में पढ़ाई का बेहतर माहौल मिलेगा। घरेलू कामकाज भी पहले की तुलना में आसान हो जाएगा। भविष्य में छोटे रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी खुलेंगे।

इस परियोजना के तहत नई विद्युत लाइन और ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से यह कार्य पूरा हुआ। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद विभाग ने काम पूरा किया। ग्रामीण लंबे समय से बिजली की मांग कर रहे थे। अब स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी। कार्लाकोंटा में यह बदलाव विकास की नई शुरुआत माना जा रहा है।

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ऑयल पॉम की खेती पर बढ़ी चिंता, किसानों को आय का इंतजार

बस्तर में ऑयल पॉम खेती को भविष्य की फसल बताकर किसानों को प्रोत्साहित किया गया था। लेकिन अब कई किसान इस फैसले को लेकर चिंता जता रहे हैं। जिले के 123 किसानों ने करीब 300 हेक्टेयर में पौधरोपण किया है। सरकार की योजना के तहत पौधे और कुछ सहायता उपलब्ध कराई गई। लेकिन किसानों का कहना है कि अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि तीन साल तक फसल से आय नहीं होती। इस दौरान केवल देखभाल और खर्च बढ़ता रहता है।

पहले जहां किसान दूसरी फसलों से कमाई कर रहे थे, अब इंतजार करना पड़ रहा है। बाजार में पाम ऑयल की मांग जरूर है। लेकिन शुरुआती वर्षों में आर्थिक दबाव किसानों पर बढ़ रहा है। अब किसान अतिरिक्त सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन की मांग कर रहे हैं। ताकि भविष्य की इस खेती पर उनका भरोसा कायम रह सके।

खेत में करंट बना काल, सिंचाई के दौरान किसान की मौत

बस्तर। भानपुरी थाना क्षेत्र के कुम्हली गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। धान रोपाई की तैयारी के दौरान खेत में करंट लगने से किसान की मौत हो गई। मृतक की पहचान पूर्व सरपंच टीकम सिंह बघेल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वे मोटर पंप का बिजली कनेक्शन जोड़ रहे थे। इसी दौरान अचानक विद्युत प्रवाहित होने से हादसा हो गया। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मदद के लिए पहुंचे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है।

पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। यह घटना खेतों में विद्युत सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों ने बिजली उपकरणों के सुरक्षित उपयोग की सलाह दी है।

सुरक्षा गार्ड से मारपीट मामले में कार्रवाई पर उठे सवाल

जगदलपुर। धरमपुर स्थित एक निजी प्रतिष्ठान में बुजुर्ग सुरक्षा गार्ड से मारपीट का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। घटना का सीसीटीवी सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गंभीर मारपीट के बावजूद हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया गया।इससे आरोपियों को तत्काल राहत मिल गई।

परिजनों का कहना है कि वे भय और मानसिक तनाव में जीवन गुजार रहे हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फुटेज में पूरी घटना स्पष्ट दिखाई दे रही है। फिर भी अब तक सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर अन्य धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। फिलहाल पूरे मामले पर शहरभर की नजर बनी हुई है।

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