सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरियों से संबंधित याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया जिन्होंने हरित मानदंडों का उल्लंघन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना पहले मंजूरी के नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू नहीं होंगे. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार के 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन को रद्द कर दिया, जिसके तहत बिना पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी के शुरू की गई परियोजनाओं को पूर्वप्रभावी पर्यावरणीय मंजूरी देने की व्यवस्था बनाई गई थी.

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने  कहा कि यह फैसला भावी प्रभाव से लागू होगा और पहले से पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) प्राप्त परियोजनाएं इससे प्रभावित नहीं होंगी.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बुधवार को विकास और पर्यावरण के संतुलन को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला सुनाया. अदालत ने साफ कहा कि अब किसी भी नई परियोजना पर काम शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी लेना अनिवार्य होगा. साथ ही उस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है, जिसमें उद्योगों और विकास परियोजनाओं को पहले काम शुरू करने और बाद में पूर्वव्यापी (Ex-post facto) पर्यावरण मंजूरी लेने की अनुमति दी गई थी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ 49 याचिकाओं पर फैसला सुनाया. ये याचिकाएं उन परियोजनाओं से जुड़ी थीं, जिन्होंने पर्यावरण के नियम तोड़े थे और उन्हें बाद में मंजूरी दी गई थी.

साफ साफ शब्दों में कहा जाए तो सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार के 2021 के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार को परियोजनाओं को काम होने के बाद या प्रोजेक्ट की समाप्ति के बाद पर्यावरणीय मंजूरी देने का अधिकार दिया गया था. आगे से कोई भी कंपनी बिना पहले इजाजत लिए अपना काम शुरू नहीं कर पाएगी.

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