सुशीला देवी, गुरुग्राम। साइबर अपराध पुलिस ने ऑनलाइन ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने पेंशन सेवा दोबारा शुरू कराने के नाम पर साढ़े तेरह लाख रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाले गिरोह के एक मुख्य मददगार को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान फरीदाबाद जिले के मोहना गांव के रहने वाले मंगत के रूप में हुई है। आरोपी मंगत पर आरोप है कि उसने साइबर अपराधियों को ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए अपने बैंक खाते किराए पर या बेच दिए थे।

यह पूरा मामला इसी साल चौबीस मई को सामने आया था। एक पीड़ित व्यक्ति ने साइबर अपराध थाना पश्चिम में शिकायत दर्ज कराई थी कि बीती बीस और इक्कीस मई के बीच उनके पास एक फोन आया था। फोन करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने खुद को एक्सिस बैंक के मुख्य दफ्तर का बड़ा अधिकारी बताया। उसने पीड़ित को झांसा दिया कि वह उसकी बंद पड़ी पेंशन सेवा को दोबारा बहाल करा देगा। बातों में आकर पीड़ित ने ठग के बताए खातों में कुल तेरह लाख साठ हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब ठगी का अहसास हुआ तो पुलिस में शिकायत की गई।
पूछताछ में एक बड़ा खुलासा
जांच के दौरान एएसआई दीपांकर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कड़ी से कड़ी जोड़ी और चौबीस जून को आरोपी मंगत को दबोच लिया। पुलिस पूछताछ में एक बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी ने बताया कि उसने अपने चार बैंक खातों की बैंकिंग किट एक दूसरे अपराधी को एक लाख दस हजार रुपये के कमीशन के बदले बेची थी। बैंकिंग किट का सीधा मतलब बैंक खाते की पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और ऑनलाइन लॉगइन आईडी-पासवर्ड से होता है। साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी का पैसा मंगाने और निकालने के लिए करते हैं ताकि वे खुद पुलिस की पकड़ से बच सकें।
पेंशन ठगी की वारदात में करता था खातों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में साफ हुआ है कि मंगत के इन चार खातों में से तीन खातों का इस्तेमाल सीधे तौर पर इस पेंशन ठगी की वारदात में किया गया था। गुरुग्राम पुलिस अब इस आरोपी से बहुत गहनता से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने अब तक और कितने बैंक खाते अपराधियों को बेचे हैं और देश में चल रही अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों में उसकी क्या भूमिका रही है। पुलिस टीम अब इस गिरोह के बाकी मुख्य सदस्यों की तलाश में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर रही है।

