भिवानी के नंदगांव निवासी नरेंद्र यादव ने 1962 के युद्ध में शहीद हुए 114 अहीर वीर जवानों के बलिदान को याद करने के लिए साइकिल यात्रा शुरू की है। यह यात्रा लद्दाख के रेजांगला से शुरू होकर करीब 6000 किलोमीटर दूर कन्याकुमारी तक पहुंचेगी।

भिवानी। जिले के नंदगांव निवासी प्रसिद्ध साइकिल मैन नरेंद्र यादव ने एक बार फिर देशभक्ति की अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने साल 1962 के भारत-चीन युद्ध में लद्दाख के दुर्गम रेजांगला मोर्चे पर शहीद हुए 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 114 वीर अहीर सैनिकों की अमर गाथा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। इस पवित्र उद्देश्य के लिए उन्होंने भारत-चीन सीमा से सीधे कन्याकुमारी तक के लिए एक विशाल रज कलश यात्रा की शुरुआत की है। नरेंद्र यादव अपनी इस राष्ट्रव्यापी मुहिम के दौरान साइकिल से लगभग 6000 किलोमीटर की लंबी और कठिन दूरी तय करेंगे। इस यात्रा का मुख्य मकसद देश के नागरिकों को रेजांगला के अमर बलिदानियों के अद्वितीय शौर्य से रूबरू करवाना है।

दुर्गम रास्तों पर देशभक्ति का जज्बा

यह ऐतिहासिक साइकिल यात्रा देश के सबसे खतरनाक और दुर्गम माने जाने वाले इलाकों से होकर गुजर रही है। नरेंद्र यादव समुद्र तल से करीब 17 हजार फीट की अत्यधिक ऊंचाई वाले बर्फीले रेजांगला क्षेत्र में साइकिल चला रहे हैं जहां ऑक्सीजन की भारी कमी रहती है। इस मुश्किल क्षेत्र में तापमान शून्य से काफी नीचे रहता है और लगभग 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज बर्फीली हवाएं चलती हैं। ऐसी विपरीत और जानलेवा भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भिवानी का यह जांबाज साइकिलिस्ट हाथों में शान से तिरंगा थामे और शहीदों की पवित्र स्मृतियों को संजोए हुए लगातार आगे की ओर बढ़ रहा है।

टूटी हड्डियों के बाद भी अडिग हौसला

राजमिस्त्री का काम करने वाले नरेंद्र यादव की यह देशभक्ति यात्रा इसलिए भी अद्भुत है क्योंकि वे एक गंभीर शारीरिक हादसे से उबरने के बाद इस अभियान पर निकले हैं। कुछ समय पहले एक दुर्घटना के दौरान वे दूसरी मंजिल से नीचे गिर गए थे जिससे उनके हाथ और पैर की हड्डियां बुरी तरह टूट गई थीं। इस बड़े हादसे के बाद भी उन्होंने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया और साइकिल को ही अपनी ताकत बना लिया। नरेंद्र इससे पहले भी नेपाल, गंगासागर, गुजरात, अयोध्या और कश्मीर से रामेश्वरम तक साइकिल से लगभग 21 हजार किलोमीटर की यात्राएं पूरी कर चुके हैं। उन्होंने देशवासियों से शहीदों के सम्मान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगाने और शाकाहार अपनाने की अपील की है।