अजय सैनी, भिवानी। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कॉलेज में ओपीडी सेवाएं वर्ष 2025 में शुरू हुई थीं और शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन ने 100 एमबीबीएस सीटों की अनुमति दी है। इसके बावजूद मशीनों के संचालन, विशेषज्ञ चिकित्सकों की व्यवस्था और भवन में बारिश के दौरान रिसाव जैसी समस्याओं को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में करीब 620 बिस्तरों वाला शिक्षण अस्पताल है। इसका उद्देश्य भिवानी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना है। लेकिन मौजूदा व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।
ओपीडी शुरू हुई, विशेषज्ञों की व्यवस्था पर सवाल
वर्ष 2025 में मेडिकल कॉलेज में ओपीडी सेवाएं शुरू की गई थीं। आरोप है कि शुरुआती दौर में चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों को यहां सेवाओं के लिए लगाया गया।
मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक सुविधाओं की जरूरत होती है। ऐसे में व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि कॉलेज में सभी जरूरी सेवाएं तय मानकों के अनुसार कब तक पूरी तरह उपलब्ध होंगी।
मशीनें हैं, लेकिन रसायनों की कमी का आरोप
कॉलेज में प्रयोगशाला जांच के लिए करोड़ों रुपये की मशीनें स्थापित किए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि इनमें इस्तेमाल होने वाले जरूरी रसायन लंबे समय से उपलब्ध नहीं कराए गए।
रसायनों के बिना मशीनों का पूरा उपयोग नहीं हो सकता। इससे जांच सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही मशीनों की वारंटी और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इन दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
भवन में रिसाव और बेसमेंट में पानी भरने की शिकायत
मेडिकल कॉलेज के भवन को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि बारिश के दौरान भवन के कई हिस्सों में रिसाव होता है।
यह भी कहा गया है कि हांसी रोड स्थित मेडिकल अकादमी ब्लॉक के बेसमेंट में बारिश के दौरान पानी भर जाता है, जिससे व्यवस्था प्रभावित होती है। कॉलेज भवन 1 अप्रैल 2025 को अधिग्रहित किया गया था।
भवन की स्थिति और रखरखाव को लेकर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठाई जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बाद कुछ दिन बेहतर हुआ तालमेल
जुलाई में हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के भिवानी दौरे के दौरान मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं का मुद्दा उनके सामने उठाया गया था।
बताया गया कि उन्होंने मेडिकल कॉलेज और नागरिक अस्पताल के अधिकारियों को आपसी तालमेल से संस्थान चलाने के निर्देश दिए थे, ताकि लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
इसके बाद कुछ समय तक व्यवस्थाओं में सुधार और विभागों के संचालन की बात सामने आई। ऑपरेशन थिएटर, प्रयोगशाला, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, आंतरिक वार्ड समेत कई सेवाएं शुरू होने का दावा किया गया।
प्रशासनिक तालमेल को लेकर भी उठे सवाल
मेडिकल कॉलेज और चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल के अधिकारियों के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा रही है। आरोप है कि दोनों संस्थानों के बीच प्रशासनिक स्तर पर खींचतान का असर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग की ओर से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं है।
निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की अनुपस्थिति का दावा
कॉलेज की कार्यप्रणाली को लेकर एक और दावा सामने आया है। बताया गया कि एक अधिकारी ने सुबह निरीक्षण के दौरान करीब 20 शिक्षकों को ड्यूटी पर अनुपस्थित पाया था।
इसके बाद उपस्थिति को लेकर सख्ती करने और बायोमेट्रिक प्रणाली से आने-जाने की जानकारी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक रिकॉर्ड या विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
2017 में रखी गई थी आधारशिला
पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज की आधारशिला वर्ष 2017 में रखी गई थी। कॉलेज हरियाणा सरकार का सरकारी मेडिकल संस्थान है।
हाल ही में नेशनल मेडिकल कमीशन ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए यहां 100 एमबीबीएस सीटों की अनुमति दी है। कॉलेज में करीब 620 बिस्तरों वाला शिक्षण अस्पताल है।
यहां एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, प्रसूति एवं स्त्री रोग, बाल रोग, ईएनटी, नेत्र रोग, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, डेंटिस्ट्री और मनोरोग समेत कई विभाग शामिल हैं।
कॉलेज का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट से पूछा गया सवाल
मेडिकल कॉलेज भवन में बारिश के दौरान रिसाव को लेकर मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. धीरज परिहार से बातचीत की गई।
उनसे भवन की छत से पानी टपकने और बेसमेंट में पानी भरने के संबंध में सवाल किया गया। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी भवन का पानी नालियों के जरिए निकलता है।
इसके बाद उनसे दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
मेडिकल कॉलेज की मशीनों, भवन की स्थिति, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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