भिवानी का पंडित नेकीराम शर्मा मेडिकल कॉलेज सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी को यहाँ स्थानांतरित तो कर दिया गया, लेकिन पर्याप्त व्यवस्था न होने से मरीजों को जांच के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
अजय सैनी, भिवानी। जिले का पंडित नेकी राम शर्मा मेडिकल कॉलेज अभिशाप साबित हो रहा है क्योंकि मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं के नाम पर मामला 0 से नीचे है। चिकित्सकों का टोटा है, इसीलिए चौधरी बंसी लाल नागरिक अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं को मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया और अस्पताल की ओपीडी को बंद कर दिया गया। इस कारण रोगियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। मजे की बात तो यह है कि मेडिकल कॉलेज के भवन में बैठे डॉक्टर जब कोई सिटी स्कैन, एक्स रे या प्रयोगशाला जांच भी लिखते हैं, तो उसे चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल में भागना पड़ता है। बेचारा रोगी तो इधर-उधर दौड़ लगाकर हांफने लगता है।
विधायक घनश्याम सर्राफ के सामने लोगों ने अनेक बार अपना दुखार रोया, लेकिन उन पर कोई असर दिखाई नहीं दिया। हकीकत यह है कि घनश्याम सर्राफ के कहने पर ही चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल की ओपीडी पंडित नेकीराम शर्मा मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित की गई थी ताकि उन्हें भिवानी मेडीकल कॉलेज ओपीडी को शुरू कराने का श्रेय मिल सके।
राजनीतिक खींचतान में फंसा कॉलेज निर्माण
हालांकि यह दीगर बात है कि भिवानी में मेडिकल कॉलेज स्वीकृत कराने में किरण चौधरी की अहम भूमिका थी। 2013 के आखिर में केन्द्र सरकार ने मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति दी थी। लेकिन हरियाणा में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की सरकार थी, हुड्डा का किरण चौधरी से छत्तीस का आंकड़ा था, इसलिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज का काम शुरू नहीं होने दिया। भिवानी के साथ स्वीकृत दो अन्य मेडिकल कॉलेज मात्र दो वर्षों में तैयार हो गए और लोगों को सुविधाएं भी मिलने लगी।
राजस्थान के चूरू में भी मेडिकल कॉलेज भिवानी के साथ मंजूर हुआ था। चूरू का मेडिकल कॉलेज दो साल के रिकॉर्ड समय में बनकर पूरा भी हो गया और 6 महीने बाद उसमें सेवाएँ व स्वास्थ्य शिक्षा भी शुरू हो गई। जबकि भिवानी के मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर न सरकार गंभीर नजर आई और न ही जनप्रतिनिधि सक्रिय नजर आए। अतीत पर नज़र डालें तो इसे कांग्रेस शासनकाल में वर्ष 2013 में स्वीकृति मिली थी और निर्माण के लिए ₹2300000000 की धनराशि भी खाते में डाली गई थी ताकि तत्काल कार्रवाई हो सके।
नाम बदलने से नहीं बदली व्यवस्था
करीब एक साल बाद केंद्र में भाजपा की सरकार आ गई तो मेडिकल कॉलेज निर्माण की राह भी मुश्किल हो गई। हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए तो यहाँ भी भाजपा की सरकार बन गई। भूपेंद्र सिंह हुड्डा की उपेक्षा झेलने वाला भिवानी एक बार फिर भाजपा सरकार के निशाने पर आ गया। सरकार आने के बाद भी इसका निर्माण चालू नहीं हुआ और आका टाल-मटोल करते रहे। जब जनता की आवाज़ बुलंद हुई, तब जाकर काम शुरू हुआ, लेकिन तब तक लागत कई गुना बढ़ गई थी। देर आए दुरुस्त आए, निर्माण किसी तरह शुरू हो गया।
निर्माण से पूर्व एक बार शिलान्यास कार्यक्रम भी हुआ, लेकिन बाद में उस जगह पर निर्माण नहीं हुआ, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा मौजूद थे। निर्माण पूरा होने के बाद इसका नाम भी बदल दिया गया, पर नेताओं को यह नहीं पता कि नाम बदलने से स्वरूप नहीं बदलता। जो सुविधाएं मिलनी चाहिए थी वो मुहैया क्यों नहीं हो पाई, इस पर किसी का ध्यान नहीं है। केवल पब्लिक को परेशान करने के लिए पैंतरेबाजी की जाती है। नागरिक अस्पताल की पुरानी सुविधाएं इससे कई गुना बेहतर थीं।

