भिवानी विधायक घनश्याम सर्राफ ने शहर की बुनियादी समस्याओं जैसे पानी, बिजली और सफाई व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के जवाब दिए हैं। हालांकि, विधायक के इन जवाबों से जनता के बीच असंतोष और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
अजय सैनी, भिवानी। हरियाणा के भिवानी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक घनश्याम सर्राफ ने लगातार चौथी बार जीत हासिल कर अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवा लिया है। चार बार विधायक बनने का यह कीर्तिमान कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। लेकिन सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही शहर की बुनियादी समस्याओं पर उनकी प्रतिक्रिया ने सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों—पेयजल संकट, सफाई व्यवस्था, प्रॉपर्टी आईडी की गड़बड़ी, अस्पताल की ओपीडी बंद होना, सड़कों के गड्ढे और बिजली-पानी की कमी—पर विधायक ने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिए। क्या यह जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है या वास्तविकता को नजरअंदाज करना? इस खास रिपोर्ट में हम विधायक के ‘खरी-खरी’ जवाबों को शहरवासियों की आवाज के साथ रखकर विश्लेषण करेंगे।
भिवानी, जो हरियाणा का एक प्रमुख जिला है, अपनी सांस्कृतिक धरोहर और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से शहरीकरण की चपेट में यह शहर बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। विधायक सर्राफ की चार विधानसभाई जीत ने उन्हें क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली हस्ती बना दिया है। वे खुद को ‘जनसेवी’ कहते हैं, लेकिन हालिया बातचीत में शहर की समस्याओं पर उनके जवाबों ने विपक्ष और आम जनता को नाराज कर दिया। वार्ड नंबर 24 के निवासी अशोक कुमार, कॉमरेड ओमप्रकाश, सुरेश रामनिवास, पूर्व पार्षद देवराज मेहता, बिंदु कृष्ण संतराम, वेद प्रकाश जैसे कई लोग सामने आए। आइए, इन शिकायतों को एक-एक करके समझें और विधायक के जवाबों की पड़ताल करें।

पेयजल संकट: नहर का बहाना या स्थायी समाधान की कमी?
शहर का सबसे गंभीर मुद्दा पेयजल है। गर्मियों में भिवानी के घर-घर में पानी का टैंकर ही संकटमोचक बन जाता है। वार्ड 24 के अशोक कुमार ने कहा, “पेयजल और प्रॉपर्टी आईडी के मुद्दे पर नगर निगम सुस्त है। नहर सूखी रहती है, टैंक खाली हो जाते हैं।” जैन चौक के बिंदु कृष्ण संतराम ने शिविरों और युक्त पेयजल सप्लाई की मांग की। कृष्णा कॉलोनी के वेद प्रकाश, मनोज, सुभाष, गुलशन और परम ने भी दो वर्षों से ओपीडी के साथ पानी की समस्या जोड़ी।
विधायक सर्राफ का जवाब? “शहर में कोई समस्या नहीं है। नहर में पानी नहीं तो टैंकों में कहां से आएगा? अब नहर में पानी आ गया है, सप्लाई हो रही है। सीवर मिक्सचर की शिकायतें कम हुई हैं। सुपर सक्शन मशीन मंगवाई गई है।” यह सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन हकीकत अलग है। भिवानी की नहरें भाखड़ा-ब्यास प्रोजेक्ट पर निर्भर हैं, जो मानसून पर टिकी हैं। 2025 की गर्मियों में 40 दिनों तक पानी की कटौती चली। नगर निगम के आंकड़े बताते हैं कि शहर के 60% इलाकों में 24×7 सप्लाई का सपना अभी दूर है। सुपर सक्शन मशीन का जिक्र अच्छा है, लेकिन यह कब लगेगी? स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, यह मशीन पिछले साल मंगाई गई थी, लेकिन अभी तक ट्रायल स्टेज पर है।

शहरवासी पूछते हैं: 6 साल पहले सुधारने का वादा किया था, आज तक क्यों लटका? विधायक का हल्का अंदाज—”हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, शहर में कोई समस्या नहीं”—जनता को चुभा। अगर नहर पर निर्भरता है, तो वैकल्पिक स्रोत जैसे बोरवेल या रेनवाटर हार्वेस्टिंग क्यों नहीं? पड़ोसी शहर फतेहाबाद ने ट्यूबवेल नेटवर्क से सफलता पाई।
भिवानी क्यों पिछड़ रहा?
सफाई व्यवस्था: हड़ताल का बहाना या निगम की नाकामी?कॉमरेड ओमप्रकाश ने सफाई पर सवाल उठाया। शहर की गलियां कचरे से पटती हैं, डोर-टू-डोर कलेक्शन नाममात्र का है। विधायक बोले, “सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते स्थिति बनी। वर्मा शहर अन्य शहरों से साफ-सुथरा है। नगर परिषद संतोषजनक।

“हड़ताल तो 2025 में 15 दिनों की थी, उसके बाद क्या? भिवानी नगर निगम के 2025-26 बजट में सफाई पर 12 करोड़ आवंटित हुए, लेकिन व्यय केवल 8 करोड़। स्वच्छ भारत मिशन के तहत रैंकिंग में भिवानी 50वें स्थान पर खिसक गया। नया बाजार के निवासी कहते हैं, “कचरा उठाने वाले 10-10 दिन इंतजार कराते हैं।” विधायक का ‘अन्य शहरों से बेहतर’ दावा खोखला लगता है—हिसार और रोहतक में मशीनीकृत सफाई चल रही है। क्या हड़ताल हमेशा का बहाना बनेगी?
प्रॉपर्टी आईडी का चक्कर: कागजात पूरे करो, समस्या सुलझेगी?
नया बाजार के सुरेश रामनिवास अभय ने कहा, “गलत प्रॉपर्टी आईडी से लोग परेशान। कुछ की बनती ही नहीं, कर्मचारी चक्कर कटवाते हैं।” विधायक: “नियमानुसार काम होगा। कागजात पूरे तो कोई परेशानी नहीं। सुधार हो रहा है, स्थायी समाधान आएगा।”प्रॉपर्टी आईडी हरियाणा सरकार की डिजिटल पहल है, लेकिन भिवानी में जाम। जिला कलेक्टरेट के डेटा से 20% आवेदन रिजेक्ट हो रहे। कारण? पुराने रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन की कमी। विधायक का जवाब जिम्मेदारी टालता है—कागजात तुम्हारे, समस्या हमारी नहीं। लेकिन गलत आईडी के केस कोर्ट तक पहुंचे हैं। सुधार कब? 2026 तक का वादा पुराना हो चुका।
अस्पताल ओपीडी बंद: मेडिकल कॉलेज नाम का फायदा?
पूर्व पार्षद देवराज मेहता, अक्षय, नरेश, सुशील कुमार ने चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल की ओपीडी बंद होने पर सवाल किया। “मेडिकल कॉलेज नाम के लिए शुरू, डॉक्टर वहां चले गए। आम आदमी परेशान।” कृष्णा कॉलोनी वालों ने दो साल के प्रयास बताए।
विधायक: “ऐसा कुछ नहीं। बेहतर सुविधा मिली। ओपीडी मेडिकल में चल रही। 3-4 महीने में सुधार। डॉक्टरों की कमी नहीं।” लेकिन हकीकत? 2024 में ओपीडी बंद कर मेडिकल कॉलेज शिफ्ट किया गया। अब सामान्य मरीज 10 किमी दूर जाते हैं। मेडिकल कॉलेज के 200 डॉक्टर, लेकिन ओपीडी स्लॉट केवल 20%। NHM रिपोर्ट: भिवानी में प्रति 1000 मरीज पर 0.8 डॉक्टर, राष्ट्रीय औसत से कम। विधायक का ‘गोलमाल’ जवाब—बात घुमाना—जनता को संतुष्ट नहीं करता। क्यों न ओपीडी अलग रखी?

सड़कें और गलियां: गड्ढों का जाल, बरसात का डर
पुराना हाउसिंग बोर्ड के नवीन, केशव सिंह, धर्मवीर, जैसा राम: “गलियों में गड्ढे। वाहन चलाना मुश्किल, बरसात में तो पानी भर जाता।” विधायक: “हर भाग में निर्माण हो रहा। शिकायत पर तत्काल कार्रवाई।
“सड़क निर्माण पर 2025-26 में 50 करोड़ खर्च, लेकिन अमृत योजना के तहत केवल 30% पूरा। मानसून में 2025 में 15 जगह जलभराव। विधायक का ‘तत्काल’ वादा कितना कारगर? पिछले 6 साल में सैकड़ों शिकायतें लटकीं।
बिजली और विकास: गुणात्मक सुधार का दावाविधायक ने खुद कहा,
“बिजली में सुधार, गलियां बन रही। सरकार विकास पर ध्यान। हर आदमी को राहत।” लेकिन DHBVN के आंकड़े: 2026 में 8 घंटे की औसत कटौती। सोलर प्रोजेक्ट लटके। विकास का दावा सच्चा लगे, तो बुनियादी सुविधाएं पहले।
विधायक सर्राफ की लोकप्रियता उनकी मेहनत से बनी, लेकिन ये जवाब जिम्मेदारी से बचाव लगते हैं। विपक्ष नेता कहते हैं, “चार बार जीत, लेकिन शहर वही।” शहरवासी उम्मीद करते हैं—वादों से आगे कदम। नगर निगम चुनाव नजदीक, ये मुद्दे गरमाएंगे।भिवानी की जनता इंतजार कर रही—क्या विधायक सुनेंगे?

