भुवनेश्वर: ओडिशा में बने कम दबाव के क्षेत्र ने पूरे राज्य में आफत खड़ी कर दी है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से खासकर उत्तरी ओडिशा के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जलका, सालंदी और वैतरणी नदियां तेजी से उफान पर हैं, जिससे शाम तक कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बालेश्वर के नीलगिरि में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा मयूरभंज और बालेश्वर जिलों में भी बादलों ने जमकर तबाही मचाई है। प्रशासनिक अनुमान के मुताबिक, वैतरणी नदी में इस बार बड़ी बाढ़ देखने को मिल सकती है। इसका सीधा असर भद्रक जिले के कई इलाकों पर पड़ने वाला है, जहाँ जगह-जगह पानी भरने की आशंका है।
धामनगर, दशरथपुर और चांदबाली में हालात चिंताजनक हो सकते हैं। सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि के पानी में डूबने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
वैतरणी नदी के आखुआपदा घाट पर भले ही पानी अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन शाम तक इसके पार होने का पूरा अनुमान है। वहीं जलका नदी माखनी ब्रिज के पास शाम तक 6.8 से 7 मीटर के स्तर को छू सकती है।
महानदी में कल शाम जो ‘पीक फ्लड’ की स्थिति बनी हुई थी, उसमें आज दोपहर 12 बजे के बाद से सुधार देखा गया है। मुंडली में भी पानी का स्तर धीरे-धीरे नीचे आ रहा है। राहत की बात यह भी है कि हीराकुड बांध के फिलहाल सिर्फ 2 गेट ही खुले हैं और अगले दो दिनों तक नए गेट खोलने की कोई योजना नहीं है।
हालांकि, पुरी, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा के निचले इलाकों में भारी बारिश की वजह से जलभराव की समस्या खड़ी हो सकती है। इस साल मानसून का मिजाज काफी अलग रहा है। दक्षिण ओडिशा में इस बार उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है, जिसके चलते वहां के जलाशयों में पानी का स्टॉक काफी कम है।सुवर्णपुर में इस सीजन में अब तक सबसे ज्यादा बारिश हुई है। गजपति जिला बारिश के मामले में सबसे पीछे रहा है।


