अजय सैनी, भिवानी। छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध भिवानी में मंगलवार को श्रावणी शिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर के विभिन्न शिव मंदिरों में शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ देश में अमन और शांति की कामना की।

शिवरात्रि के अवसर पर मंदिरों में सुबह से ही बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। शिवभक्त नाचते-गाते और भगवान शिव का गुणगान करते हुए मंदिरों में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालु हरिद्वार से कांवड़ के माध्यम से गंगाजल लेकर पहुंचे और उसी गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

जोगीवाला शिव मंदिर में अलसुबह से लगी कतारें

भिवानी के जोगीवाला शिव मंदिर में श्रावणी शिवरात्रि को लेकर विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला। मंदिर में अलसुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। बड़ी संख्या में शिवभक्त भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचे।

श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और देश में शांति की कामना की। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक माहौल बना रहा और शिवभक्त भोलेनाथ के जयकारे लगाते नजर आए।

गोमुख, हरिद्वार और गंगोत्री से लाया गया गंगाजल

शिवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में शिवभक्त गोमुख, हरिद्वार और गंगोत्री से गंगाजल लेकर भिवानी पहुंचे। श्रद्धालुओं ने कांवड़ के रूप में लाए गए गंगाजल को भगवान शिव को अर्पित किया। शिवभक्तों का कहना है कि भगवान शिव उनकी सभी मुरादें पूरी करते हैं। इसी आस्था के साथ उन्होंने शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाकर देश में अमन-चैन और सुख-शांति की प्रार्थना की।

मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु दूर-दूर से गंगाजल लेकर आते हैं और शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

साढ़े तीन सौ साल पुराना है जोगीवाला शिव मंदिर का इतिहास

जोगीवाला शिव मंदिर को छोटी काशी भिवानी के प्राचीनतम मंदिरों में माना जाता है। मंदिर के महंत वेदनाथ महाराज ने बताया कि यह मंदिर करीब साढ़े तीन सौ वर्ष पुराना है। सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष कृपा होती है और इस दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

उन्होंने बताया कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की मुरादें पूरी होती हैं। सावन के महीने में कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने की भी विशेष धार्मिक मान्यता है।

श्रावणी शिवरात्रि का बताया महत्व

महंत वेदनाथ महाराज ने श्रावणी शिवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिवभक्त श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं और कांवड़ यात्रा के माध्यम से गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

उन्होंने बताया कि गोमुख, हरिद्वार और गंगोत्री से गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा श्रद्धालुओं में विशेष आस्था रखती है। भारत में काशी के बाद सबसे अधिक कांवड़ छोटी काशी भिवानी में चढ़ाई जाती हैं। यही वजह है कि श्रावणी शिवरात्रि के दौरान भिवानी के शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं।

मंदिर में रात से ही शुरू हो गया था श्रद्धालुओं का पहुंचना

जोगीवाला शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना देर रात से ही शुरू हो गया था। सुबह करीब 2 बजे से मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए कतारों में खड़े रहे।

शिवभक्तों ने भगवान शिव को आदि और अनंत बताते हुए कहा कि उनकी कृपा सभी पर समान रूप से होती है। श्रावणी शिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और देश में अमन-चैन की प्रार्थना की।

छोटी काशी भिवानी में श्रावणी शिवरात्रि के अवसर पर दिनभर मंदिरों में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। शिवभक्तों के जयकारों से पूरा शहर शिवमय नजर आया और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं उल्लास के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पर्व मनाया।

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