पटना। भोजपुर में आयोजित एक महापंचायत के पोस्टर को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। इस पोस्टर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ एनडीए के अन्य नेताओं की तस्वीरें छपी हैं जिस पर अब सत्ताधारी दल के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। मामला तूल पकड़ता देख सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

​प्रदर्शन करना सबका अधिकार, लेकिन पोस्टर पर आपत्ति

​राज्य सरकार के मंत्री लखींद्र पासवान ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक, जाति या धर्म के लोगों को अपनी मांगों को लेकर धरना देने, आंदोलन करने या महापंचायत आयोजित करने का पूरा अधिकार है। यदि भोजपुर में लोग अपनी समस्याओं को लेकर लामबंद हो रहे हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
​हालांकि पोस्टर में एनडीए नेताओं की मौजूदगी और मुख्यमंत्री की तस्वीर के इस्तेमाल पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई है। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस महापंचायत में एनडीए का कोई भी नेता आधिकारिक तौर पर शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहां पोस्टर में मुख्यमंत्री जी की तस्वीर का इस्तेमाल होना पूरी तरह से गलत है और यह जांच का विषय है कि आखिर ऐसी तस्वीर किसने और क्यों लगाई है।

​क्राइम, करप्शन और कास्टिंग पर जीरो टॉलरेंस

​अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार की नीति बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार क्राइम, करप्शन और कास्टिंग (जातिवाद) से जुड़े मामलों पर कभी कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि भोजपुर में हाल ही में हुई घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच चल रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

​जांच के आदेश और सियासत

​मंत्री लखींद्र पासवान ने यह दोहराया कि जनता का अपनी बात रखने का अधिकार सर्वोपरि है और वे सरकार से मांग कर सकते हैं लेकिन सरकार के शीर्ष नेतृत्व की तस्वीरों का उपयोग कर भ्रम फैलाना स्वीकार्य नहीं है। सरकार इस पूरे प्रकरण की जांच करवा रही है कि पोस्टर के पीछे किन लोगों का हाथ है और इसके पीछे की मंशा क्या है।
​इस घटनाक्रम ने राज्य में एक बार फिर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जहां एक ओर विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है वहीं सत्ता पक्ष इस विवाद से पल्ला झाड़ते हुए न्यायिक जांच पर जोर दे रहा है।