कुंदन कुमार/पटना। बिहार में बढ़ती महंगाई और आर्थिक बोझ के बीच, राज्य सरकार के नए फैसलों ने आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। शहरी क्षेत्रों के बाद अब ग्रामीण इलाकों में भी नए करों के प्रावधान और स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स की वसूली को लेकर सियासी पारा गर्म हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने इसे जनविरोधी कदम करार दिया है।
ग्रामीण विकास के नाम पर आर्थिक चोट
एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सरकारी खजाना खाली करने वाली सरकार अब उसकी भरपाई आम जनता की जेब काटकर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर पर 1200 वार्षिक टैक्स और स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स लगाने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए लाना, राज्य की गरीब जनता के साथ सीधा खिलवाड़ है। राजद प्रवक्ता ने सवाल किया कि जहां ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं पहले ही नदारद हैं वहां सरकार किस आधार पर कर वसूली की तैयारी कर रही है?
ग्राम स्वराज के सपनों के विपरीत सरकार
राजद नेता ने महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का दृष्टिकोण विकासोन्मुखी न होकर केवल राजस्व वसूली केंद्रित है। उन्होंने कहा गांवों में न तो रोजगार के साधन उपलब्ध हैं और न ही विकास की कोई स्पष्ट योजना। मजदूर और किसान किसी तरह अपना परिवार पाल रहे हैं ऐसे में उन पर 1200 का वार्षिक बोझ लादना उनके जीवनयापन को और अधिक कठिन बना देगा।
सरकार से नीति वापस लेने की मांग
एजाज अहमद ने भाजपा-नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आफत लाने वाली सरकार बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ जनता रोजगार और बेहतर सुविधाओं की उम्मीद कर रही है वहीं दूसरी ओर सरकार हर दिशा में टैक्स का जाल बिछा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार की ये नीतियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह चरमरा देंगी। अंत में उन्होंने सरकार से जनहित को ध्यान में रखते हुए इन जनविरोधी टैक्स प्रस्तावों को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

