शब्बीर अहमद, Bhopal. दिल्ली के कोचिंग हादसे से सबक लेते हुए राजधानी भोपाल का नगर निगम प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। छात्रों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले कोचिंग संचालकों की लापरवाही पर नगर निगम ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। भोपाल के 70 कोचिंग संचालकों को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम जारी किया गया है।

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प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगले 48 घंटे के भीतर इन कोचिंग संचालकों को एक ज्यूडिशियल शपथ पत्र जमा करना होगा, जिसमें यह वचन देना होगा कि वे अगले 30 दिनों के भीतर अपनी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के सभी पुख्ता इंतजाम कर लेंगे। अगर निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया, तो 10 जुलाई से कोचिंग संस्थानों को सीधे सील करने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। नगर निगम ने संचालकों के साथ हुई एक आपात बैठक में 20 पॉइंट की सख्त गाइडलाइन थमा दी है।

नियम पूरे नहीं किए, तो सीधे डलेगा ताला! ये हैं नए आदेश:

नगर निगम द्वारा जारी की गई गाइडलाइन में छात्रों की जिंदगी को सुरक्षित बनाने के लिए बेहद कड़े कदम उठाए गए हैं, जिनका पालन न करने पर सीधे सीलिंग की जाएगी:

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आपातकालीन द्वार और बेसमेंट नियम: हर संस्थान में आवश्यकता अनुसार क्षमता का फायर पंप और 2 आपातकालीन द्वार होना अनिवार्य है। इन द्वारों पर किसी भी तरह का ज्वलनशील या इलेक्ट्रिक सामान नहीं रखा जा सकेगा। साथ ही, ऑटोमेटिक लॉक होने वाले दरवाजे लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। भवन के बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा, वहाँ कक्षाएं नहीं चलेंगी।

स्प्रिंकलर और डिटेक्शन सिस्टम: 200 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले बेसमेंट में स्प्रिंकलर्स और ऑटोमेटिक डिटेक्शन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। फायर सिस्टम को हमेशा ‘ऑटो मोड’ पर रखना होगा और सभी हूटर्स को आपस में जोड़ना होगा।

मॉकड्रिल और ट्रेनिंग: हर 4 महीने में अनिवार्य रूप से मॉकड्रिल का आयोजन करना होगा। बच्चों को फायर सेफ्टी के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें फ्लूम मास्क उपलब्ध कराने होंगे। संस्थान के प्रत्येक स्टाफ सदस्य को फायर अग्निशामक यंत्र और सिक्योरिटी गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम चलाने की ट्रेनिंग दिलानी होगी।

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बिजली उपकरणों पर पाबंदी और वेंटिलेशन अनिवार्य

व्यवधान रहित निर्गम क्षेत्र: आपात स्थिति में बच्चों के बाहर निकलने वाले रास्ते को पूरी तरह से व्यवधान मुक्त रखना होगा। इस निर्गम क्षेत्र में कोई भी विद्युत उपकरण या पैनल स्थापित नहीं किया जा सकेगा।

आईकैचिंग पॉइंट्स पर संकेत: भवन के आसानी से दिखने वाले स्थानों पर ‘एक्जिट’ के संकेत चस्पा करने होंगे। इसके अलावा हर मंजिल पर भवन का एक्जिट प्लान लगाना अनिवार्य होगा।

बायपास लाइन और डीजी सेट: फायर पंप और डिटेक्शन सिस्टम को डीजी सेट से बायपास लाइन के जरिए कनेक्ट करना होगा। डीजी सेट को किसी भी हाल में रिफ्यूज एरिया या मुख्य गेट पर स्थापित नहीं किया जा सकेगा।

विद्युत और फायर ऑडिट: धुंआ बाहर निकलने के लिए प्राकृतिक वेंटिलेशन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करना होगा। इसके साथ ही, हर साल फायर एवं विद्युत ऑडिट कराना होगा और इसकी रिपोर्ट नगर निगम के फायर ब्रिगेड कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी।

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