हेमंत शर्मा, Indore. मानसून की पहली दस्तक के साथ ही मध्य प्रदेश में प्रशासनिक दावों और कागजी विकास की पोल खुलना शुरू हो गई है। इंदौर जिले की महू तहसील के कालाकुंड क्षेत्र से एक ऐसी खौफनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां के उटेडिया और शायदा गांव में स्कूली बच्चों की जिंदगी हर रोज दांव पर लग रही है। चोरल नदी में आई तेज बाढ़ के बीच ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर मासूम बच्चों को अपने कंधों पर बैठाकर उफनती रपट पार कराने को मजबूर हैं।
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यह पूरा खौफनाक मंजर कैमरे में भी कैद हुआ है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है। जरा सी चूक यहाँ किसी भी मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ सकती थी।
छुट्टी के बाद सामने खड़ी थी ‘मौत’, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
घटना मंगलवार शाम की बताई जा रही है, जब पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के चलते चोरल नदी अचानक उफान पर आ गई। नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि रपट पूरी तरह पानी में डूब गई और दोनों गांवों का आपस में संपर्क पूरी तरह कट गया।
इसी दौरान स्कूल की छुट्टी होने पर बच्चे अपने घर लौट रहे थे। एक तरफ उफनती नदी का तेज बहाव था और दूसरी तरफ उनके घर। कोई रास्ता न बचता देख गांव के जांबाज ग्रामीण खुद उफनते पानी में उतरे और एक-एक मासूम को अपने कंधों पर बैठाकर बहाव के बीच से सुरक्षित निकाला।
हर साल की यही कहानी, अफसर और नेता सिर्फ देते हैं ‘आश्वासन’
शायदा गांव के ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि हर साल बारिश के मौसम में गांव टापू में तब्दील हो जाता है। आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव तक पहुंचने के लिए एक पक्की सड़क तक नसीब नहीं हुई है। बारिश आते ही पूरा रास्ता दलदल और कीचड़ में तब्दील हो जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वे वर्षों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक सुरक्षित पुल और सड़क की मांग कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ खोखला आश्वासन देकर शांत करा दिया जाता है।
बड़ा सवाल: अगर बह जाता कोई मासूम, तो कौन लेता जिम्मेदारी?
वीडियो में साफ दिख रहा है कि पानी का बहाव कितना तेज है। ऐसे में सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह उठता है कि यदि इस दौरान संतुलन बिगड़ने से कोई बच्चा नदी के तेज बहाव में बह जाता, तो उसकी मौत की जिम्मेदारी कौन लेता? क्या प्रशासन और जिम्मेदार विभाग किसी बड़े और दर्दनाक हादसे के होने का इंतजार कर रहे हैं? आखिर कब तक इन नौनिहालों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए मौत के इस रास्ते से गुजरना पड़ेगा?
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