संजय पाटीदार, भोपाल। पवित्र सावन माह में निकलने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के एक बयान के बाद स्थिति गरमा गई है। दिग्विजय सिंह ने युवाओं को रोजगार दिए जाने के विषय को कांवड़ यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि युवाओं को कांवड़ यात्रा में शामिल किया जा रहा है, लेकिन उन्हें रोजगार या नौकरियां प्रदान नहीं की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान क्या-क्या होता है, इस पर उन्हें बोलने की आवश्यकता नहीं है।

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दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर बढ़ा विवाद

दिग्विजय सिंह के इस वक्तव्य में युवाओं के भविष्य और रोजगार के मुद्दे को कांवड़ यात्रा के आयोजन से जोड़कर देखा गया। हालांकि उनकी इस टिप्पणी पर कांवड़ यात्रा के धार्मिक और सामाजिक महत्व से जुड़े संदर्भों को लेकर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

सत्ता पक्ष का पलटवार और कड़ा विरोध

दिग्विजय सिंह के वक्तव्य के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक और सामाजिक गलियारों से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।

आपत्तिजनक और निंदनीय करार: सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं ने दिग्विजय सिंह के बयान को निंदनीय बताते हुए कहा कि सावन के पवित्र महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है।

आस्था और भावनाओं को ठेस: नेताओं ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की बयानबाजी से कांवड़ यात्रियों की श्रद्धा और सनातन परंपराओं पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

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विधायक रामेश्वर शर्मा की तीखी प्रतिक्रिया

हुजूर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने वाले युवा पढ़े-लिखे और धर्म-संस्कृति के प्रति निष्ठावान हैं। उन्होंने कहा कि हर-हर महादेव का जयघोष भारत की सेना की विभिन्न रेजिमेंटों का भी उद्घोष है, ऐसे में धार्मिक आयोजनों और युवाओं की आस्था को निशाना बनाना अनुचित है।

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