चंडीगढ़। हरियाणा के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के हरियाणा कैडर में 11 नए पदों की मंजूरी देते हुए कुल स्वीकृत संख्या 215 से बढ़ाकर 226 कर दी गई है। इस फैसले से राज्य में अधिकारियों की कमी दूर होने के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे शहरों और विकास परियोजनाओं के बेहतर प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर शक्ति निर्धारण) सातवें संशोधन विनियम-2026 के तहत यह बदलाव किया गया है। इससे पहले वर्ष 2018 में हरियाणा के आईएएस कैडर की संख्या 205 से बढ़ाकर 215 की गई थी। करीब साढ़े सात साल बाद हुए इस संशोधन को राज्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महानगरों को मिली अलग प्रशासनिक पहचान

नई अधिसूचना के तहत पहली बार गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और हिसार महानगर विकास प्राधिकरणों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के लिए अलग-अलग आईएएस कैडर पद सृजित किए गए हैं। इन पदों के गठन से शहरी विकास परियोजनाओं की निगरानी, आधारभूत ढांचे के विस्तार और शहरों के नियोजित विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

प्रशासनिक ढांचे में हुए कई बदलाव

नई व्यवस्था में वरिष्ठ ड्यूटी पदों की संख्या 117 से बढ़ाकर 123 कर दी गई है। वहीं वित्त आयुक्त एवं प्रधान सचिव स्तर के पद 12 से घटाकर 10 तथा सचिव स्तर के पद 9 से घटाकर 7 किए गए हैं।

इसके विपरीत महानिदेशक और आयुक्त श्रेणी के पदों की संख्या 1 से बढ़ाकर 3 कर दी गई है। निदेशक और परियोजना निदेशक स्तर के पदों में भी बढ़ोतरी करते हुए इनकी संख्या 1 से बढ़ाकर 5 कर दी गई है।

हांसी जिला बनने का भी दिखा असर

दिसंबर 2025 में हांसी को हरियाणा का 23वां राजस्व जिला बनाए जाने के बाद उपायुक्त (डीसी) पदों की संख्या 22 से बढ़ाकर 23 कर दी गई है। वहीं अतिरिक्त उपायुक्त-सह-सीईओ, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण एवं अतिरिक्त कलेक्टर के पदों की संख्या 7 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है।

बढ़े सीधे भर्ती और प्रमोशन कोटे के पद

नई अधिसूचना के अनुसार सीधे भर्ती होने वाले आईएएस अधिकारियों के पद 150 से बढ़ाकर 158 कर दिए गए हैं। वहीं हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) और अन्य राज्य सेवाओं से पदोन्नति के जरिए आईएएस बनने वाले अधिकारियों का कोटा 65 से बढ़ाकर 68 कर दिया गया है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि कैडर विस्तार से राज्य में अधिकारियों की कमी दूर होगी और तेजी से बढ़ते शहरीकरण तथा विकास परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।