भारत में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से ठीक दो दिन पहले ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी की उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री यवेट बेरी ने 23 जुलाई को 2026 को को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. वहीं, 25 जुलाई 2026 को भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस्तीफा दे दिया. सिर्फ 48 घंटे के अंदर दुनिया के दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के शिक्षा मंत्रियों को अपना पद छोड़ना पड़ा.
सबसे बड़ी खास बात यह है कि जांच आयोग ने उन्हें इस मामले में किसी भी तरह की गड़बड़ी का दोषी नहीं माना था. जांच आयोग ने स्पष्ट किया कि मंत्री यवेट बेरी खुद किसी भी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं थीं और उन पर कोई व्यक्तिगत गलत काम का आरोप नहीं था.
दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे को लेकर अपने अपने देश में बहुत बड़ी हलचल हुई. सबसे बड़ी गौर करने वाली बात यह है कि ऑस्ट्रेलियाई मंत्री यवेट बेरी पर किसी तरह का कोई आरोप साबित नहीं हुआ था और जांच आयोग ने उन्हें पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी थी. उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद छोड़ दिया.
वही, भारत में दो दिन बाद शनिवार को NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया. इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह पुलिस कार्रवाई, इंटरनेट बंद करने और सरकार की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे थे.
यवेट बेरी का इस्तीफा कैंपबेल प्राइमरी स्कूल के पुनर्विकास के लिए करोड़ों डॉलर के ठेके से जुड़े मामले के बाद आया. हालांकि, आयोग ने मंत्री बेरी के खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की और न ही उन्हें दोषी पाया. जांच में उन्हें पूरी तरह ‘क्लीन चिट’ मिल गई थी, फिर भी उन्होंने ईमानदारी दिखाते हुए खुद ही इस्तीफा दे दिया.
इस्तीफा देते हुए यवेट बेरी ने कहा, मैंने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि इस जांच रिपोर्ट को लेकर संसद और जनता के बीच कोई राजनीतिक तमाशा न बने. मैं अपने स्टाफ के आचरण की पूरी जिम्मेदारी लेती हूं. बेरी का इस्तीफा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कई अन्य राष्ट्रमंडल देशों में लंबे समय से चली आ रही वेस्टमिंस्टर परंपरा को भी दिखाता है.
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