पटना। बिहार में सक्रिय अंतरराज्यीय परीक्षा माफिया सिंडिकेट पर महाराष्ट्र पुलिस ने बहुत बड़ा शिकंजा कसा है। एक बड़ी और गोपनीय छापेमारी के दौरान महाराष्ट्र पुलिस ने बिहार के समस्तीपुर जिले से महाराष्ट्र टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पेपर लीक मामले के मुख्य मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता और उसके खास सहयोगी इंद्रजीत विजय सिंह को दबोच लिया है।
यह पूरी कार्रवाई महाराष्ट्र पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, लेकिन साथ ही यह बिहार की स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस शातिर अपराधी बिजेंद्र को पकड़ने में पटना पुलिस पिछले 4 साल से पूरी तरह नाकामयाब रही थी और जिसे बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) पिछले 2 साल से सरगर्मी से तलाश रही थी, उसे आखिरकार महाराष्ट्र पुलिस ने उसके पैतृक गांव से धर दबोचा। कानूनी प्रक्रिया और ट्रांजिट रिमांड की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, शनिवार को पुलिस दोनों आरोपियों को हवाई जहाज (फ्लाइट) से लेकर महाराष्ट्र के लिए रवाना हो गई।
पूछताछ और सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क की जांच
अब महाराष्ट्र पुलिस दोनों आरोपियों को अपनी हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ करेगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे पेपर लीक कांड में और कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल हैं.
- बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच: पुलिस उन सभी संदिग्ध बैंक खातों की गहराई से छानबीन कर रही है, जिनमें पेपर लीक के जरिए अवैध रूप से वसूली गई मोटी रकम ट्रांसफर की गई थी।
- अभ्यर्थियों और डीलरों की पहचान: पुणे और महाराष्ट्र के अन्य इलाकों के उन स्थानीय डीलरों तथा नौकरी के लालच में फंसे अभ्यर्थियों की शिनाख्त की जा रही है, जिन्हें यह लीक हुआ प्रश्नपत्र बेचा जाना था।
- जांच अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि इन दोनों मुख्य आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करने पर कई सनसनीखेज और बड़े राज बेनकाब होंगे। हालांकि, इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या अब पटना पुलिस या बिहार की ईओयू टीम इस मुख्य सरगना को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए रिमांड की मांग कर पाएगी?
परिवार और रिश्तेदारों तक फैला था अपराध का यह जाल
इस अंतरराज्यीय परीक्षा माफिया सिंडिकेट का नेटवर्क सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका दायरा कई राज्यों में फैला हुआ था। पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी, जिसमें परिवार के लोग भी शामिल थे:
- पत्नी की भूमिका: मास्टरमाइंड बिजेंद्र की पत्नी सुमन गुप्ता भी इस अवैध धंधे में पूरी तरह सक्रिय थी। वह फर्जी बैंक खातों के माध्यम से सिंडिकेट के काले धन का प्रबंधन करती थी और पुलिस द्वारा पकड़े गए अन्य आरोपियों की जमानत (बेल) कराने का सारा काम संभालती थी।
- साढ़ू का नेटवर्क: बिजेंद्र का साढ़ू मिथुन सिंह भी इस सिंडिकेट का अहम हिस्सा था, जिसकी मुख्य जिम्मेदारी लीक हुए प्रश्नपत्रों के सेट को सुरक्षित तरीके से विभिन्न एजेंटों तक पहुंचाना था।
- अन्य अंतरराज्यीय एजेंट: इस बड़े गिरोह में हरियाणा के रहने वाले कपिल दहिया और पवन यादव जैसे कुख्यात मुख्य एजेंट भी शामिल थे, जिनका मुख्य काम महाराष्ट्र राज्य में जाकर पेपर के लिए इच्छुक ग्राहकों की तलाश करना और पैसों की डील पक्की करना होता था।


