विकास कुमार, सहरसा। जिले में शिक्षा व्यवस्था और वित्त रहित संस्थानों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने और वित्त रहित कॉलेजों के समायोजन की प्रमुख मांगों को लेकर कांग्रेस सेवा दल और जिला कांग्रेस कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए और मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।

​वित्त रहित शिक्षकों के लिए सरकारी दर्जे की मांग

​धरना प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से वित्त रहित शिक्षकों को सरकारी दर्जा दिए जाने, समय पर मानदेय भुगतान करने तथा कॉलेजों को समुचित अनुदान उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग उठाई गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे इन शिक्षकों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है, और सरकार को इनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

​सरकार की शिक्षा नीति पर उठे सवाल

​जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार झा ने मौजूदा सरकार की शिक्षा नीति को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि गलत नीतियों के कारण आज सूबे के शिक्षक और छात्र दोनों पिस रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि वित्त रहित कॉलेजों का समायोजन अब समय की सबसे बड़ी मांग है, जिसे टाला नहीं जा सकता।

​5 सितंबर से आत्मदाह और कफन यात्रा की चेतावनी

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश सेवा दल के अध्यक्ष डॉ. संजय यादव ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि समय रहते इन जायज मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक आक्रामक बनाया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 5 सितंबर से आत्मदाह यात्रा और कफन यात्रा निकालकर इस आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर तेज किया जाएगा।
​इस धरना-प्रदर्शन और सभा में कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई।