कुंदन कुमार/ पटना। बिहार सरकार राज्य की सांस्कृतिक गरिमा को बचाने और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने के लिए अब सख्त कदम उठाने जा रही है। कला एवं संस्कृति विभाग ने सार्वजनिक स्थलों, आयोजनों और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है।
गृह विभाग को लिखा पत्र, मांगी सख्त कार्रवाई
कला एवं संस्कृति विभाग ने इस गंभीर मामले पर गृह विभाग को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में स्पष्ट रूप से अनुरोध किया गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर बजने वाले ऐसे गानों पर लगाम लगाने के लिए कठोर नीति बनाई जाए। विभाग ने चिंता जताई है कि वर्तमान में शादी-समारोहों, सार्वजनिक बाजारों, निजी व सार्वजनिक वाहनों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में जिस तरह के भद्दे और जाति आधारित गाने बज रहे हैं, वे बेहद आपत्तिजनक हैं।

सामाजिक सौहार्द और सुरक्षा पर असर
विभाग ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि इस तरह का संगीत न केवल हमारी लोक संस्कृति का अपमान है, बल्कि यह समाज के लिए एक घातक प्रवृत्ति भी है। विशेष रूप से, इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव महिलाओं और बच्चों की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। इसके अलावा, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल से समाज में विद्वेष फैलने की आशंका रहती है, जो कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए एक बड़ा खतरा है।
जिला प्रशासन को निर्देश
इस पहल को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए, कला एवं संस्कृति विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs) और पुलिस अधीक्षकों (SPs) को इस पत्र की प्रति भेजी है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन इन गानों के प्रसारण पर निगरानी रखे और उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।
बिहार सरकार की यह मंशा स्पष्ट है कि कला के नाम पर किसी को भी समाज की मर्यादा और कानून का उल्लंघन करने की छूट नहीं दी जाएगी। सरकार लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ एक सभ्य और सुरक्षित सामाजिक वातावरण का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह निर्णय राज्य में सांस्कृतिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

