सोहराब आलम/​मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन मैदान में प्रस्तावित डिजिनिलैंड मेला टेंडर घोटाले के आरोपों के बीच फंस गया है। मामले ने तूल तब पकड़ा जब मीडिया ने टेंडर प्रक्रिया में हुई धांधली को प्रमुखता से उठाया। रिपोर्ट प्रकाशित होने के महज आठ घंटे के भीतर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विवादास्पद टेंडर को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। साथ ही, मेले के आयोजन पर रोक लगाते हुए मैदान को तीन दिनों के भीतर खाली कराने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

​अनुमति देने से क्यों किया इनकार?

​सदर एसडीओ निशांत सिहाड़ा ने मेले के आयोजन के लिए अनुमति देने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। एसडीओ ने अपने आदेश में कई गंभीर प्रशासनिक व सुरक्षा संबंधी कारणों का उल्लेख किया। उन्होंने तर्क दिया कि नगर भवन मैदान का क्षेत्रफल सीमित है, जिसके कारण भीड़ बढ़ने पर ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था चरमरा सकती है। इसके अतिरिक्त, मैदान परिसर में ‘सम्राट अशोक’ की प्रतिमा निर्माण का कार्य चल रहा है, जो मेले के आयोजन में न केवल बाधा उत्पन्न करेगा, बल्कि वहां आने वाले दर्शकों की सुरक्षा के लिए भी जोखिम भरा साबित हो सकता है।

टेंडर में धांधली: 1.75 लाख से गिरकर 32 हजार पर सिमटा राजस्व

​इस पूरे विवाद की जड़ ‘टेंडर घोटाला’ है। जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष उक्त मैदान में मेला लगाने का टेंडर करीब 1.75 लाख रुपये प्रतिदिन की दर से आवंटित किया गया था। इस बार, यह टेंडर मात्र 32 हजार रुपये प्रतिदिन की मामूली दर पर आवंटित कर दिया गया। राजस्व में हुई इस भारी कटौती को लेकर पूर्व वार्ड पार्षद मणि भूषण श्रीवास्तव ने गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।

​प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई

​खबर प्रसारित होने के बाद नगर आयुक्त आशीष कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन टेंडर रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। नगर निगम द्वारा मैदान खाली कराने का नोटिस जारी होते ही नगर थाना पुलिस सक्रिय हो गई और मौके पर चल रहे निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया।
​प्रशासन की इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में हलचल है। फिलहाल नगर भवन मैदान में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक आयोजन पर रोक लगा दी गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इतनी बड़ी वित्तीय विसंगति के पीछे किन अधिकारियों या कर्मियों की भूमिका थी और क्या इस मामले में आगे कोई ठोस विभागीय जांच बिठाई जाएगी।