​बिहार में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की समय पर पहचान और असामयिक मौतों पर लगाम लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक व्यापक और महत्वाकांक्षी अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। राज्यभर में स्वास्थ्य सेवाओं को हर नागरिक के दरवाजे तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ नामक इस विशेष अभियान का आगाज बुधवार को ऊर्जा ऑडिटोरियम, पटना से मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा। तीन महीने तक यानी 30 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत सूबे के सभी 38 जिलों के लिए विशेष जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।
​इस तीन महीने लंबे विशेष अभियान का मुख्य केंद्र बिंदु छह गंभीर और लाइलाज समझी जाने वाली बीमारियां हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर मुख्य रूप से मधुमेह (शुगर), उच्च रक्तचाप (बीपी), तीन प्रमुख कैंसर (मुंह, स्तन और गर्भाशय के मुख का कैंसर), हृदय रोग, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर और सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी (सीओपीडी) की स्क्रीनिंग करेंगी। सरकार का यह प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी नागरिक वित्तीय तंगी या जागरूकता के अभाव में इन गंभीर बीमारियों के इलाज से वंचित न रहे।

​घर से लेकर अस्पताल तक इस तरह काम करेगा पूरा सिस्टम

​इस अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक मजबूत और त्रि-स्तरीय प्रणाली तैयार की है, जो घर से लेकर बड़े अस्पतालों तक आपस में जुड़ी होगी।

  • ​डोर-टू-डोर सर्वे और पहचान: इस चरण में आशा वर्कर और आशा फैसिलिटेटर, एएनएम के साथ मिलकर प्रत्येक घर का दौरा करेंगी। वे परिवारों का विवरण जुटाने के लिए फैमिली फोल्डर और कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट (सीबीएसी) फॉर्म भरेंगी, जिससे जोखिम वाले व्यक्तियों की सटीक पहचान की जा सकेगी।
  • ​आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर स्क्रीनिंग: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) और एएनएम द्वारा 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों की लंबाई, वजन और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के आधार पर स्वास्थ्य की प्राथमिक जांच की जाएगी।
  • ​रेफरल और उन्नत इलाज: स्क्रीनिंग के दौरान जिन मरीजों में गंभीर बीमारियों के लक्षण या जोखिम मिलेंगे, उन्हें तुरंत उच्च स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रेफर किया जाएगा। संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी ओपीडी आधारित विस्तृत जांच, उपचार और जटिल मामलों का विशेष प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे।
  • ​निगरानी और जवाबदेही तंत्र: अभियान की सफलता और पारदर्शिता के लिए ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। प्रखंड स्तर पर बीसीएम नोडल अधिकारी होंगे, जबकि बीएचएम और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रोजाना इसकी समीक्षा करेंगे। वहीं, जिला स्तर पर एनसीडीओ नोडल अफसर के साथ सिविल सर्जन, डीपीएम और डीएमएंडईओ पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखेंगे।

​स्वास्थ्य मंत्री का संकल्प और दूरगामी लक्ष्य

​बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने इस अभियान को लेकर स्पष्ट किया है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य गैर-संचारी रोगों की शुरुआती अवस्था में ही पहचान करना है। शुरुआती दौर में बीमारी पकड़ में आने से उसका इलाज आसान हो जाता है और समय रहते मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत नागरिकों को मुफ्त जांच, आवश्यक दवाइयां और विशेषज्ञ परामर्श एक ही छत के नीचे या उनके घर के पास उपलब्ध कराया जाएगा।
​यह अभियान न केवल ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि आम जनता को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में भी मील का पत्थर साबित होगा। स्वास्थ्य विभाग के इस डोर-टू-डोर मेडिकल सर्वे से लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है।