पटना। ​बिहार के सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने और शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शिक्षा विभाग एक बड़ा और बेहद कड़ा कदम उठाने जा रहा है। आगामी 21 मई से राज्यभर में मॉनिटरिंग का एक नया और आधुनिक डिजिटल सिस्टम लागू होने जा रहा है, जिसे ‘बिहार ईजी स्कूल ट्रैकिंग’ (BEST) नाम दिया गया है। इस एडवांस ट्रैकिंग सिस्टम के दायरे में राज्य के 76 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों को लाया जाएगा, जिससे न सिर्फ शिक्षकों की मनमानी पर रोक लगेगी बल्कि पूरी स्कूली व्यवस्था पारदर्शी बनेगी।

​फर्जी हाजिरी के खेल का होगा अंत

​इससे पहले तक स्कूलों की निगरानी ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल के जरिए की जाती थी। हालांकि, उस पुराने सिस्टम में एक गंभीर तकनीकी खामी थी, जिसका फायदा कुछ शिक्षक उठा रहे थे। कई शिक्षक अपना मोबाइल फोन दूसरे कर्मचारियों को सौंपकर खुद स्कूल से नदारद रहते थे और उनकी फर्जी हाजिरी लग जाती थी। इसके अलावा, छात्रों की उपस्थिति का डेटा भी समय पर अपडेट नहीं हो पाता था। नया ‘बीईएसटी’ (BEST) ऐप इस हेराफेरी को पूरी तरह रोक देगा। यह ऐप इतना एडवांस है कि इसमें किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या गड़बड़ी करने की कोशिश करते ही सीधे शिक्षा विभाग के मुख्यालय को अलर्ट चला जाएगा। अब केवल हाजिरी ही नहीं, बल्कि स्कूल खुलने-बंद होने का समय और पोशाक व किताबों के वितरण का पूरा डेटा भी रियल-टाइम में ट्रैक किया जाएगा।

​कम छात्र संख्या पर नपेंगे हेडमास्टर

​नए नियमों के तहत छात्रों की उपस्थिति को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया गया है। यदि किसी स्कूल में छात्रों की हाजिरी 60% से कम पाई जाती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर वहां के प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) और प्रधान शिक्षक जिम्मेदार होंगे। उन्हें विभाग को लिखित स्पष्टीकरण देना होगा कि आखिर बच्चों की उपस्थिति इतनी कम क्यों है और उन्होंने छात्रों को स्कूल लाने के लिए क्या जमीनी प्रयास किए हैं। अब शिक्षकों और हेडमास्टरों को अभिभावकों से मिलकर बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना होगा। विभाग ने स्कूलों में न्यूनतम 75% उपस्थिति का लक्ष्य तय किया है।

​बदलेगा पढ़ाई का ढर्रा और तय हुआ अफसरों का टारगेट

​इस नई व्यवस्था के तहत न सिर्फ अनुशासन सुधरेगा, बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए शिक्षण पद्धतियों में भी बदलाव किया जाएगा। आधुनिक तकनीकी माध्यमों और मजेदार ट्रिक्स के जरिए बच्चों को पाठ याद कराए जाएंगे।
​साथ ही, अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके लिए मासिक निरीक्षण का कोटा निर्धारित कर दिया गया है:

  • ​जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO): हर महीने 8 प्रारंभिक और 3 माध्यमिक/उच्च माध्यमिक स्कूलों की जांच करेंगे।
  • ​जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO): हर महीने 10 प्रारंभिक और 5 माध्यमिक/उच्च माध्यमिक स्कूलों का निरीक्षण करेंगे।

​इसके अलावा, हर बुधवार और गुरुवार को स्कूलों की विशेष जांच का अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान यदि कोई भी शिक्षक बिना सूचना के गायब मिला, तो उसका वेतन तुरंत रोक दिया जाएगा।