सहरसा। जिले में मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कहरा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बसदेवा में मध्यान भोजन के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई, जहां खाने में छिपकली मिलने से हड़कंप मच गया। इस दूषित भोजन का सेवन करने से 25 स्कूली छात्र बीमार हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
तुरंत कार्रवाई और निलंबन
घटना की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के निर्देश पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक ब्रजेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही, लापरवाही बरतने वाले तीनों रसोइयों को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मामले की निष्पक्ष और गहरी जांच के लिए सहरसा के जिला पदाधिकारी को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित करने का आदेश दिया गया है।
सप्लायर एजेंसी पर शिकंजा
जिला शिक्षा पदाधिकारी के प्रतिवेदन के आधार पर, संबंधित क्षेत्र के 144 विद्यालयों में भोजन आपूर्ति करने वाली एनजीओ ‘भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति’ के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने इस एजेंसी की बिल (विपत्र) राशि में कटौती करने का निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से बचा जा सके।
राज्य में मिड-डे मील योजना का दायरा और बजट
बिहार सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत हर रोज राज्य के करीब 1.09 करोड़ छात्र-छात्राओं को दोपहर का भोजन परोसा जाता है। इस योजना पर सरकार सालाना लगभग 4 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। राज्यभर में तय मैन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें से करीब 40 हजार छात्रों के लिए भोजन विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से विद्यालयों तक पहुंचाया जाता है।
सुरक्षा नियमों के बावजूद थम नहीं रहे हादसे
सरकारी स्तर पर सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े नियम होने के बावजूद धरातल पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले चार महीनों में ही राज्यभर से 50 से अधिक ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें अब तक 250 से अधिक मासूम छात्र बीमार हो चुके हैं। भोजन में छिपकली के अलावा सांप, डिटर्जेंट और कीड़े मिलने जैसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र बेहद कमजोर है।
इस साल सामने आए प्रमुख मामले
- सितंबर: मुजफ्फरपुर के साहेबगंज प्रखंड में मरी हुई छिपकली मिलने से 71 बच्चे बीमार हुए, जबकि मोकामा में भोजन में मरा हुआ सांप मिला।
- अगस्त: नालंदा के नूरसराय स्थित स्कूल में रसोइए द्वारा नमक की जगह डिटर्जेंट मिला देने से 40 बच्चे बीमार पड़ गए।
- मई: वैशाली के नीलकंठपुरा विद्यालय में भोजन में छिपकली की पूंछ मिलने से दर्जनों बच्चे बीमार हुए, वहीं सहरसा के बालूआहा में भी छोटा सांप मिला।
- फरवरी: मधेपुरा सदर प्रखंड के कारू टोला स्कूल में छिपकली वाला खाना खाने से 70 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए।
- 2013 का छपरा हादसा: सारण जिले के गंडामन गांव में कीटनाशक युक्त तेल से बने भोजन के कारण 23 मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जो आज भी इस योजना के इतिहास का सबसे बड़ा काला अध्याय है।



