कुंदन कुमार, पटना‌। बिहार सरकार में मंत्री लखेंद्र पासवान ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम को लेकर जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि बीजेपी कार्यालय में प्रत्येक दिन अलग-अलग मंत्रियों की मौजूदगी में जनसुनवाई कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित होता है, जहां आम जनता की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाता है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले की तुलना में अब जनसुनवाई में आने वाले लोगों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘सहयोग शिविर’ का ऐलान है, जिसके बाद अब लोग अपनी शिकायतों के निवारण के लिए वहां भी पहुंच रहे हैं।

​मुख्यमंत्री के वायरल वीडियो पर विपक्ष की आलोचना

​मुख्यमंत्री के निजी जीवन और हालिया वायरल वीडियो को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर मंत्री लखेंद्र पासवान ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उदाहरण दिया कि जैसे गले में खराश या खींचगाहट होने पर आयुर्वेदिक दवा का सेवन किया जाता है, वैसे ही उस सामान्य प्रक्रिया को लेकर वीडियो को सनसनीखेज बनाकर वायरल किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सदन से गायब रहने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी है, इसलिए उन्हें अपने पद की गरिमा और मर्यादा का पूरा ख्याल रखना चाहिए।

​आरजेडी और कांग्रेस को देशभक्ति का खुला चैलेंज

​मंत्री लखेंद्र पासवान ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस पार्टी को खुले तौर पर देशभक्ति की चुनौती दी है। उन्होंने चैलेंज करते हुए कहा कि यदि इन दलों के नेताओं में थोड़ी भी देशभक्ति की भावना है, तो वे सड़कों पर तिरंगा यात्रा निकालकर दिखाएं। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ये वही लोग हैं जो अक्सर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के अपमान से जुड़े मामलों में चर्चा में रहते हैं। मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का अपमान करने वाले ऐसे तत्वों के खिलाफ बेहद सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।

​शराबबंदी और प्रशासनिक लापरवाही पर दो टूक राय

​बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय का समर्थन राज्य की हर एक पार्टी ने सर्वसम्मति से किया था, जिसमें जीतन राम मांझी जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल रहे हैं। ताड़ी जैसे प्राकृतिक उत्पादों और शराबबंदी के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि शराबबंदी के बावजूद किसी थाना क्षेत्र या जिला मुख्यालय के भीतर अवैध शराब बेरोकटोक मिल रही है, तो इसे सीधे तौर पर पुलिस-प्रशासन की गंभीर चूक माना जाना चाहिए। ऐसे मामलों में दोषी प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अंत में उन्होंने जीतन राम मांझी को एक वरिष्ठ और मार्गदर्शक नेता बताते हुए कहा कि सरकार उनके दिए गए सकारात्मक सुझावों का पूरा सम्मान करती है और उन पर अमल भी कर रही है।