कुंदन कुमार/पटना। बिहार विधान परिषद के प्रवेश द्वार पर आज छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सदस्यों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। राजद के सभी सदस्य छात्रों पर हाल ही में हुए लाठीचार्ज को लेकर सरकार से सदन के भीतर कड़ा जवाब मांग रहे हैं, लेकिन सरकार इस पूरे घटनाक्रम को छात्र आंदोलन मानने से पूरी तरह इंकार कर रही है।
​इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई और पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखे बयानों का दौर शुरू हो गया। राजद ने सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है, वहीं सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष को हर मुद्दे पर खुली चुनौती दे डाली है।

​अब्दुल बारी सिद्दीकी का बयान: 1974 के आंदोलन से की तुलना

​धरना स्थल पर मौजूद राजद के वरिष्ठ नेता और विधायक अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह आंदोलन ऐतिहासिक 1974 के छात्र आंदोलन की तर्ज पर ही आगे बढ़ रहा है। आज का युवा अपने बुनियादी हक और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर है।
​सिद्दीकी ने आगे कहा कि राज्य के युवाओं के भविष्य को पूरी तरह बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि आखिर यह कौन सा नियम है कि लगातार पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार इसकी नैतिक जिम्मेदारी तक लेने को तैयार नहीं है। जिम्मेदार मंत्रियों से इस्तीफा दिलवाने के बजाय सरकार उल्टे-सीधे बयान दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश और राज्य के नाराज छात्रों का स्वतःस्फूर्त आंदोलन है। राजद नेता ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार इस गंभीर मुद्दे पर सदन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देगी, तब तक विपक्ष सदन की कार्यवाही नहीं चलने देगा।

​सत्ता पक्ष का पलटवार: नितिन नवीन की खुली चुनौती

​राजद के हंगामे और धरने के बीच सत्ता पक्ष की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। मंत्री नितिन नवीन ने राजद और पूरे विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि हम पूरे विपक्ष को खुली चुनौती देते हैं।
​उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष मैदान में भागने के बजाय सदन के पटल पर आकर छात्र, युवा और नीट (NEET) समेत हर एक विषय पर खुलकर चर्चा करे। एनडीए सरकार हर मोर्चे पर जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और सदन में किसी भी प्रकार की चर्चा से पीछे हटने वाली नहीं है।
​इस प्रकार, विधान परिषद के बाहर और भीतर चल रहे इस राजनीतिक घमासान के कारण राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है।