पटना। राज्य से सटी भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आंतरिक सुरक्षा को लेकर अब पहले से कहीं अधिक सतर्कता और कड़ी निगरानी बरती जाएगी। सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ राज्य के सभी जिलों में होने वाली हर छोटी-बड़ी संदिग्ध गतिविधि और आपराधिक घटनाओं पर बिहार पुलिस की पैनी नजर रहेगी। इस महत्वपूर्ण लक्ष्य को हासिल करने के लिए पुलिस के आसूचना तंत्र (इंटेलिजेंस नेटवर्क) को और अधिक मजबूत तथा आधुनिक बनाया जा रहा है।
विशेष शाखा में 138 तेज-तर्रार दारोगा की हुई तैनाती
पुलिस मुख्यालय के स्तर से खुफिया तंत्र को सुदृढ़ करने की ठोस शुरुआत कर दी गई है। इसके तहत बिहार पुलिस के 1300 से अधिक पदाधिकारियों में से 138 सबसे काबिल और तेज-तर्रार दारोगा (पुलिस अवर निरीक्षक) का चयन कर उन्हें विशेष शाखा (स्पेशल ब्रांच) में तैनात किया गया है। दरअसल, विशेष शाखा के लिए तकनीकी अनुसंधान (टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन) में दक्ष अधिकारियों की आवश्यकता थी। इसे देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने जनवरी माह में ही गूगल फॉर्म के जरिए मनोनयन के लिए आवेदन मांगे थे। कुल 1369 प्राप्त आवेदनों में से 138 दारोगा का अंतिम रूप से चयन हुआ है। मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिया है कि चयनित पदाधिकारियों को अविलंब विशेष शाखा में योगदान के लिए विरमित करें, लेकिन यह सुनिश्चित कर लें कि उन पर कोई भी आपराधिक मामला लंबित न हो।
729 किलोमीटर लंबी नेपाल सीमा की चुनौतियां
बिहार राज्य की करीब 729 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से लगती है। यह सीमा पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज समेत कुल सात जिलों से होकर गुजरती है। नेपाल के साथ खुली सीमा होने के कारण यहां घुसपैठ, अवैध व्यापार, मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की खेप, नकली मुद्रा और विदेशी सामानों की तस्करी जैसी गंभीर शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। इसके अलावा, बंगाल, झारखंड और उत्तरप्रदेश से लगने वाले सीमावर्ती क्षेत्र भी काफी संवेदनशील माने जाते हैं।
आईजी बॉर्डर का नया पद और आईबी की कार्ययोजना
इन तमाम राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए ही विशेष शाखा को मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने हाल ही में विशेष तौर पर आईजी बॉर्डर के एक नए पद का भी सृजन किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब हर जिले में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पदाधिकारियों की टीम तैनात होगी। यह टीम स्थानीय पुलिस से सीधा समन्वय स्थापित कर अहम सूचनाओं का आदान-प्रदान करेगी और पुलिस मुख्यालय को अपनी नियमित रिपोर्ट भेजेगी। विशेष शाखा को मुख्य रूप से सूचना संकलन तंत्र, संवेदनशील जानकारियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डेटा विश्लेषण और प्रभावी सीमा प्रबंधन पर फोकस करने का सख्त निर्देश दिया गया है। इन कड़े कदमों से उम्मीद जताई जा रही है कि सीमा पार की आपराधिक गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी।

